रामअवतार जग्गी हत्याकांड में बड़ा मोड़: सुप्रीम कोर्ट से अमित जोगी को अंतरिम राहत, उम्रकैद की सजा पर लगाई रोक
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड में एक अहम कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। इस मामले में उम्रकैद की सजा पा चुके पूर्व विधायक अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उनकी उम्रकैद की सजा पर फिलहाल रोक लगा दी है। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस जेजे विक्रम नाथ, संदीप मेहता और विजय बिश्नोई की पीठ ने यह अंतरिम आदेश पारित किया।
सोमवार को भी हुई थी अहम सुनवाई, याचिकाओं को किया गया था क्लब
इससे पहले सोमवार को भी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई थी। अदालत के समक्ष दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई थीं, जिन्हें कोर्ट ने एक साथ जोड़ते हुए क्लब कर दिया था। सुनवाई के दौरान एक याचिका हाईकोर्ट के आदेश के तहत सरेंडर पर रोक से जुड़ी थी, जिसे चैंबर में प्रस्तुत किया गया था। वहीं दूसरी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की दो नंबर बेंच ने विचार किया था। उस दौरान अदालत ने स्पष्ट कर दिया था कि इस चरण में सरेंडर से संबंधित किसी भी प्रकार की अंतरिम राहत नहीं दी जाएगी और इस विषय पर अंतिम निर्णय चैंबर जज द्वारा लिया जाएगा।
2003 में हुई थी एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी की हत्या
यह पूरा मामला वर्ष 2003 में एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी की हत्या से जुड़ा है। चार जून 2003 को अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी। इस हत्याकांड में कई आरोपियों को दोषी ठहराया गया था। हालांकि, वर्ष 2007 में निचली अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था। बाद में इस फैसले को चुनौती दी गई, जिसके बाद मामला उच्च न्यायालय पहुंचा और फिर सर्वोच्च न्यायालय तक आ गया।
कानूनी प्रक्रिया जारी, आगे की सुनवाई पर टिकी नजर
सुप्रीम कोर्ट द्वारा सजा पर लगाई गई रोक के बाद अब इस मामले की आगे की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। यह मामला लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया में है और हर सुनवाई के साथ नए मोड़ सामने आ रहे हैं। फिलहाल, अमित जोगी को मिली इस अंतरिम राहत को इस केस में एक महत्वपूर्ण विकास माना जा रहा है।
