पॉलीहाउस किसानों का 25 सितंबर को देशव्यापी प्रदर्शन, 10 राज्यों में NHB कार्यालयों के बाहर उठेगी आवाज
भोपाल: देशभर के पॉलीहाउस किसान 25 सितंबर 2026 को सुबह 11 बजे राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) के राज्य कार्यालयों के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे। किसानों की प्रमुख चिंताएं संरक्षित खेती के लिए सहायता दर में बदलाव, लंबित आवेदनों, सहायता की पात्रता, नए जीओसी आवेदनों पर रोक और संशोधित दिशा-निर्देशों के क्रियान्वयन को लेकर हैं। प्रदर्शन को लेकर किसानों की ओर से उठाई जा रही मांगों के बीच NHB ने हाल में लंबित सब्सिडी दावों को लेकर यह स्पष्ट किया है कि पात्र पुराने मामलों पर संशोधित दिशानिर्देशों को पूर्व प्रभाव से लागू नहीं किया जाएगा।
10 राज्यों में अलग-अलग जगहों पर होगा प्रदर्शन
पॉलीहाउस किसानों का प्रदर्शन अहमदाबाद, जयपुर, भोपाल, लखनऊ, बेंगलुरु, देहरादून, चंडीगढ़, रायपुर और चेन्नई में प्रस्तावित है। महाराष्ट्र में गणपति विसर्जन को देखते हुए पुणे में 28 सितंबर और नासिक में 29 सितंबर को प्रदर्शन किया जाएगा।
21 अगस्त का NHB परिपत्र वापस लेने की मांग
पॉलीहाउस किसान संघ की प्रमुख मांग राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के 21 अगस्त 2026 के संशोधित परिपत्र को वापस लेने की है। संघ का कहना है कि इतने बड़े नीतिगत बदलाव को पर्याप्त संक्रमण अवधि के बिना लागू किए जाने से पहले से प्रक्रिया में चल रही परियोजनाओं को लेकर अनिश्चितता पैदा हुई है।
किसानों की मांग है कि 21 अगस्त 2026 से पहले जमा किए गए सभी पुराने जीओसी आवेदन, जिन पर अभी जीओसी लंबित है, उन्हें पुराने नियमों के तहत ही संसाधित किया जाए। संघ चाहता है कि राहत केवल उन परियोजनाओं तक सीमित न रहे, जिनकी जीओसी पहले ही जारी हो चुकी है।
किसानों के मुताबिक, जिन्होंने पुराने नियमों के आधार पर आवेदन जमा किए, शुल्क दिया और परियोजना की योजना तथा वित्तीय व्यवस्था शुरू की, उनके मामलों को भी पुराने दिशा-निर्देशों के तहत स्पष्ट रूप से सुरक्षित किया जाना चाहिए।
नए जीओसी आवेदन शुरू करने की मांग
किसानों और संरक्षित खेती से जुड़े उद्योग की एक अन्य प्रमुख मांग नए जीओसी आवेदन तत्काल दोबारा शुरू करने और नई जीओसी जारी करने की प्रक्रिया बहाल करने की है। किसानों का कहना है कि आवेदन और जीओसी प्रक्रिया लंबे समय तक रुकी रहने से नई परियोजनाओं के साथ पॉलीहाउस निर्माता, निर्माणकर्ता, सामग्री आपूर्तिकर्ता, कृषि विशेषज्ञ, अभियंता और तकनीशियन भी प्रभावित होते हैं।
संघ के अनुसार, अगर संशोधित दिशा-निर्देशों को लागू करने के लिए NHB को अतिरिक्त समय की जरूरत है, तो भी नए आवेदन अनिश्चितकाल तक नहीं रोके जाने चाहिए। इसके लिए स्पष्ट प्रक्रिया और समय-सीमा जारी की जानी चाहिए।
पुरानी परियोजनाओं को सुरक्षा देने की मांग
किसानों का कहना है कि कई परियोजनाओं में पहले लागू नियमों के आधार पर बैंक से वित्तीय सहायता ली गई, आवेदन जमा किए गए, जीओसी प्राप्त की गई और जमीन को बैंक के पास जमानत के तौर पर रखा गया। कुछ परियोजनाओं में निर्माण और सामग्री की खरीद भी शुरू हो चुकी है। ऐसे मामलों में पुराने नियमों के तहत संरक्षण देने की मांग की जा रही है।
50 प्रतिशत सहायता बहाल करने की मांग
संघ ने संरक्षित खेती के लिए सहायता 50 प्रतिशत से घटाकर 35 प्रतिशत किए जाने पर भी चिंता जताई है। किसानों के मुताबिक सहायता में कमी से उन परियोजनाओं का वित्तीय बोझ बढ़ गया है, जिनकी योजना पहले की लागत और सहायता व्यवस्था को ध्यान में रखकर बनाई गई थी।
किसानों की मांग है कि संरक्षित खेती के लिए 50 प्रतिशत सहायता बहाल की जाए। वैकल्पिक तौर पर परियोजना लागत के मानकों को मौजूदा बाजार कीमतों के अनुरूप संशोधित करने की मांग की गई है।
परिवार आधारित पात्रता और जीएसटी नियमों में बदलाव की मांग
किसानों ने जीओसी प्रक्रिया को स्पष्ट करने, परिवार आधारित पात्रता नियमों की समीक्षा और किसान समूहों को दोबारा मान्यता देने की मांग भी उठाई है। इसके अलावा ₹50,000 के आवेदन शुल्क और उस पर लगने वाले जीएसटी की समीक्षा तथा पॉलीहाउस के घटकों पर जीएसटी को 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने की मांग की गई है।
संघ ने संरक्षित खेती के लिए पर्याप्त बजट आवंटित करने की मांग भी रखी है।
क्या हैं पॉलीहाउस किसानों की प्रमुख मांगें
- 21 अगस्त 2026 का NHB परिपत्र वापस लिया जाए।
- संरक्षित खेती के लिए 50 प्रतिशत सहायता बहाल की जाए।
- 21 अगस्त से पहले जमा किए गए सभी लंबित जीओसी आवेदनों को पुराने नियमों के तहत संसाधित किया जाए।
- जीओसी जारी हो चुकी, निर्माणाधीन, जेआईटी पूरी हो चुकी और लंबित सहायता वाले मामलों को पुराने दिशा-निर्देशों के तहत स्पष्ट संरक्षण दिया जाए।
- नए जीओसी आवेदन तत्काल दोबारा शुरू किए जाएं और नई जीओसी जारी करने की प्रक्रिया बहाल की जाए।
- परिवार आधारित पात्रता और किसान समूहों से जुड़े नियमों की समीक्षा की जाए।
- आवेदन शुल्क और जीएसटी से जुड़े मुद्दों पर पुनर्विचार किया जाए।
- बड़े नीतिगत बदलावों से पहले उचित संक्रमण अवधि और स्पष्ट लिखित दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
