मंत्री सुरेश खन्ना साइकिल से पहुंचे विधानसभा कार्यालय, पंकज चौधरी ने भी फ्लीट घटाई, ऊर्जा बचत अभियान को मिला बढ़ावा
लखनऊ: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने की अपील के बाद गुरुवार को उत्तर प्रदेश में इसका असर देखने को मिला। राज्य के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना साइकिल से अपने विधानसभा कार्यालय पहुंचे, जबकि बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने अपने काफिले में वाहनों की संख्या घटाने का फैसला लिया।
साइकिल से विधानसभा पहुंचे सुरेश खन्ना
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना 10 कालिदास मार्ग स्थित अपने सरकारी आवास से साइकिल चलाकर विधानसभा स्थित अपने कार्यालय पहुंचे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के संदेश के अनुरूप वे हर सप्ताह कम से कम एक दिन साइकिल से कार्यालय जाएंगे। उनका कहना था कि यह सिर्फ प्रतीकात्मक कदम नहीं, बल्कि राष्ट्रीय दायित्व का हिस्सा है।
ऊर्जा संरक्षण को बताया राष्ट्रीय आवश्यकता
सुरेश खन्ना ने कहा कि देश में पेट्रोल और डीजल की बड़ी मात्रा विदेशों से आयात होती है, जिससे भारी विदेशी मुद्रा खर्च होती है। उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए ईंधन की बचत आज की आवश्यकता है और हर नागरिक को इसमें योगदान देना चाहिए।
पंकज चौधरी ने फ्लीट में की कटौती
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने अपने काफिले में सुरक्षा वाहन के अलावा अन्य सहायक वाहनों की संख्या कम करने का निर्णय लिया है। उन्होंने इसे ऊर्जा संरक्षण और स्वच्छ पर्यावरण की दिशा में एक कदम बताया।
जनता से भी बचत अभियान में शामिल होने की अपील
पंकज चौधरी ने लोगों से अपील की कि वे भी इस अभियान में भाग लें और सार्वजनिक परिवहन व कारपूलिंग जैसे विकल्पों को अपनाएं। उन्होंने कहा कि यह प्रयास देश को आर्थिक रूप से मजबूत करने और पर्यावरण संरक्षण में मदद करेगा।
सीएम योगी का मितव्ययिता संदेश
इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंत्रिमंडल के सदस्यों से सप्ताह में कम से कम एक दिन सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने की अपील की थी। उन्होंने सरकारी कार्यशैली में मितव्ययिता, ऊर्जा संरक्षण और जनप्रेरक आचरण को बढ़ावा देने पर जोर दिया था।
फ्लीट 50 प्रतिशत तक घटाने का सुझाव
मुख्यमंत्री ने मंत्रियों से अपने वाहनों की फ्लीट को 50 प्रतिशत तक कम करने और अगले छह महीनों तक अपरिहार्य परिस्थितियों को छोड़कर विदेश यात्राओं से बचने के निर्देश भी दिए थे। उनका उद्देश्य शासन में सादगी और ऊर्जा संरक्षण की नई कार्यसंस्कृति विकसित करना है।
