Saturday, April 25, 2026
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मध्य प्रदेश

दतिया में अफसरों का बदला अंदाज: कलेक्टर-एसपी ने गांव में खाट पर गुजारी रात, जन-चौपाल में सुनीं समस्याएं और मौके पर दिए समाधान

दतिया। मध्य प्रदेश के दतिया जिले के बीकर गांव में प्रशासन का एक अलग और संवेदनशील चेहरा उस समय देखने को मिला, जब कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े और एसपी सूरज कुमार वर्मा ने एसी कमरों से बाहर निकलकर गांव में ही रात बिताई। दोनों अधिकारियों ने न सिर्फ जन-चौपाल लगाकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं, बल्कि खाट पर रुककर गांव के जीवन को करीब से समझने का प्रयास भी किया।

जन-चौपाल में ग्रामीणों से सीधा संवाद, योजनाओं की जमीनी हकीकत जानी

गांव पहुंचते ही कलेक्टर और एसपी ने जन-चौपाल आयोजित कर ग्रामीणों से सीधे संवाद किया। इस दौरान उन्होंने सरकारी योजनाओं की जमीनी स्थिति का आकलन किया और पूछा कि लोगों को इन योजनाओं का वास्तविक लाभ मिल रहा है या नहीं। ग्रामीणों ने भी खुलकर अपनी समस्याएं रखीं, जिनमें पेयजल, सड़क, बिजली, राशन वितरण और आवास से जुड़ी शिकायतें प्रमुख रहीं।

मौके पर समाधान के निर्देश, कई समस्याओं का तुरंत निपटारा

दोनों अधिकारियों ने केवल शिकायतें सुनकर औपचारिकता नहीं निभाई, बल्कि कई मामलों में तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। संबंधित विभागों को मौके पर ही निर्देशित किया गया, जिससे कई समस्याओं का उसी समय समाधान भी हुआ। इस पहल ने ग्रामीणों में भरोसा और संतोष दोनों बढ़ाया।

बच्चों से संवाद, शिक्षा और अनुशासन का दिया संदेश

दौरे के दौरान कलेक्टर और एसपी ने गांव के बच्चों से भी बातचीत की। कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने बच्चों को पढ़ाई पर ध्यान देने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया, वहीं एसपी सूरज कुमार वर्मा ने अनुशासन और लक्ष्य निर्धारण के महत्व पर जोर दिया। बच्चों ने भी खुलकर अपनी बात रखी, जिससे माहौल सकारात्मक बना।

खाट पर बिताई रात, ग्रामीणों को भाया अधिकारियों का जमीन से जुड़ा अंदाज

रात के समय दोनों अधिकारी गांव में ही खाट पर आराम करते नजर आए। यह दृश्य ग्रामीणों के लिए खास रहा, क्योंकि आमतौर पर वरिष्ठ अधिकारी गांव में रुकने से परहेज करते हैं। अधिकारियों का यह सादा और जमीनी अंदाज लोगों को बेहद पसंद आया।

प्रशासन और जनता के बीच बढ़ा भरोसा

ग्रामीणों ने अधिकारियों की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे न केवल समस्याओं का समाधान तेजी से होता है, बल्कि प्रशासन और जनता के बीच की दूरी भी कम होती है। बीकर गांव का यह दौरा प्रशासनिक संवेदनशीलता और जनसेवा का एक मजबूत उदाहरण बनकर सामने आया है।