झारखंड में फिर सड़कों पर उतरे पूर्व सरकारी कर्मचारी, सचिवालय में घुसे प्रदर्शनकारी; जानिए क्यों भड़का आंदोलन
रांची: झारखंड में सरकारी नौकरियों से जुड़े विवाद को लेकर एक बार फिर आंदोलन शुरू हो गया है। कैबिनेट की विशेष बैठक के बाद कार्मिक विभाग की ओर से जेएसएससी सीजीएल समेत 22 प्रतियोगी परीक्षाएं रद्द किए जाने के खिलाफ बर्खास्त किए गए पूर्व सहायक शाखा पदाधिकारियों ने बुधवार को प्रदर्शन किया। सैकड़ों पूर्व कर्मचारी सुबह से प्रोजेक्ट भवन के बाहर धरने पर बैठे रहे और बाद में पैदल मार्च भी निकाला।
बारिश के बीच प्रदर्शनकारी सुबह करीब 11:30 बजे तक प्रोजेक्ट भवन के बाहर शांतिपूर्ण ढंग से धरने पर बैठे रहे। दोपहर करीब 12 बजे प्रदर्शनकारियों ने बंद गेट को जबरन खोल दिया और प्रोजेक्ट भवन परिसर में प्रवेश कर वहीं धरना शुरू कर दिया।
परीक्षा और नियुक्तियां रद्द करने का फैसला वापस लेने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने और नियुक्तियां समाप्त करने के फैसले को वापस लेने की मांग की। इस दौरान कई प्रदर्शनकारी जमीन पर लेटकर रोते और अपनी स्थिति बताते नजर आए। उनका कहना था कि उन्हें अदालत के आदेश के बाद नियुक्ति मिली थी। कई अभ्यर्थियों ने इस पद पर नियुक्त होने के लिए अपनी पुरानी नौकरी तक छोड़ दी थी।
प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों से सचिवालय परिसर खाली कर विधानसभा के पास धरना देने को कहा गया। हालांकि, प्रदर्शनकारी पुरानी विधानसभा के पास ही धरना देने की मांग पर अड़े रहे।
भूख हड़ताल के दबाव में फैसला लेने का आरोप
पूर्व कर्मचारियों ने सरकार पर आरोप लगाया कि कुछ लोगों की भूख हड़ताल के दबाव में एकतरफा फैसला लिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार अपना निर्णय वापस नहीं लेती है तो उनके परिवार के लोग भी आंदोलन में शामिल होंगे।
देर शाम प्रदर्शनकारियों ने प्रोजेक्ट भवन से हटिया रेलवे स्टेशन तक पैदल मार्च निकाला। इस दौरान उन्होंने मोबाइल की टॉर्च जलाकर मार्च किया।
बहाली होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
हटिया के डीएसपी नीरज कुमार ने प्रदर्शनकारियों से नियमों का पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सचिवालय संवेदनशील क्षेत्र है और यहां भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू है। उन्होंने चेताया कि संवेदनशील क्षेत्र में प्रदर्शन करने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
प्रदर्शन स्थल पर मौजूद पूर्व कर्मचारियों ने आपसी सहयोग से भोजन की व्यवस्था भी की। सैकड़ों प्रदर्शनकारी कतार में लगकर भोजन लेते नजर आए। इस दौरान किसी तरह की अफरा-तफरी नहीं हुई और प्रदर्शनकारियों ने एकजुटता के साथ अपना विरोध जारी रखा।
