गरबा विवाद पर रामेश्वर शर्मा के बयान को लेकर मोदी-भागवत समेत BJP नेतृत्व से शिकायत, कांग्रेस नेता ने पूछा- ‘क्या यही हिंदुत्व है?’
सागर: मध्य प्रदेश में गरबा आयोजनों में मुस्लिम युवकों की भागीदारी को लेकर भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा के बयान पर राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। अब खुरई से कांग्रेस नेता अंशुल परिहार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, मुख्यमंत्री मोहन यादव और मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को स्पीड पोस्ट के जरिए खुला पत्र भेजा है। यह पत्र रामेश्वर शर्मा की टिप्पणी के विरोध में भेजा गया है। शर्मा ने गरबा आयोजनों में मुस्लिम युवकों की मौजूदगी को लेकर कहा था कि मुस्लिम गरबा में आएं तो अपनी बहन-बेटियों को भी साथ लेकर आएं। उनके बयान के अंत में ‘हमारे भी घोड़े तैयार हैं’ जैसी टिप्पणी भी सामने आई थी।
अंशुल परिहार ने अपने पत्र में कहा कि उन्होंने यह पत्र केवल कांग्रेस नेता के तौर पर नहीं, बल्कि एक हिंदू, सनातनी और भारतीय के तौर पर लिखा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी भी धर्म की महिलाओं और बेटियों को राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा बनाया जाना उचित है।
‘क्या यही हिंदुत्व है?’
खुले पत्र में अंशुल परिहार ने भाजपा नेतृत्व से सवाल किया कि क्या किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि को किसी समुदाय की बहन-बेटियों को लेकर इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार हिंदुत्व का अर्थ महिलाओं के सम्मान और कमजोरों की रक्षा से है, न कि किसी समुदाय की महिलाओं को लेकर डर या असहजता पैदा करने वाली भाषा का इस्तेमाल करना।
भाजपा नेतृत्व से स्थिति स्पष्ट करने की मांग
पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर भाजपा और संघ नेतृत्व तक से इस मामले में सवाल किए गए हैं। अंशुल परिहार ने कहा कि यदि रामेश्वर शर्मा का बयान भाजपा की आधिकारिक नीति का प्रतिनिधित्व नहीं करता है तो पार्टी नेतृत्व को इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि भाजपा नेतृत्व रामेश्वर शर्मा को तलब करे और उनसे सार्वजनिक स्पष्टीकरण लिया जाए। साथ ही भाजपा यह भी स्पष्ट करे कि विधायक द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा पार्टी की नीति या विचारधारा का प्रतिनिधित्व नहीं करती।
कानूनी कार्रवाई की भी मांग
कांग्रेस नेता ने मांग की है कि यदि बयान किसी कानून का उल्लंघन करता है तो मामले में निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई की जाए। इसके अलावा उन्होंने भविष्य में किसी नेता द्वारा महिलाओं या किसी समुदाय की बहन-बेटियों को लेकर ऐसी भाषा का इस्तेमाल न हो, इसके लिए स्पष्ट संदेश जारी करने की मांग की है।
‘सवाल सिर्फ एक बयान का नहीं’
अंशुल परिहार ने कहा कि मामला केवल एक नेता के बयान तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि राजनीतिक दलों के नेताओं की सार्वजनिक भाषा और महिलाओं के सम्मान से भी जुड़ा है। उनका कहना है कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन महिलाओं की गरिमा को राजनीतिक बयानबाजी से अलग रखा जाना चाहिए।
उन्होंने भाजपा नेतृत्व से यह भी पूछा कि यदि रामेश्वर शर्मा की टिप्पणी पार्टी की स्वीकार्य भाषा नहीं है तो नेतृत्व की ओर से इस पर स्पष्ट प्रतिक्रिया और कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
कांग्रेस नेताओं ने जताया समर्थन
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पत्र को कांग्रेस के प्रदेश प्रतिनिधि आशु भाई जान, वरिष्ठ नेता लक्ष्मीकांत ताम्रकार, वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्रशेखर मैसन, वरिष्ठ कांग्रेस नेता एडवोकेट डीपी रैकदास, हिम्मत सिंह रघुवंशी, गणेश मैसन, आसिफ खान, अल्पसंख्यक कांग्रेस अध्यक्ष इमरान खान, यंग ब्रिगेड अध्यक्ष शाकिर राईन और विजय सोलंकी समेत अन्य कांग्रेस कार्यकर्ताओं का समर्थन मिला है।
गरबा आयोजनों में मुस्लिमों की भागीदारी को लेकर मध्य प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी तेज है। रामेश्वर शर्मा के बयान पर कांग्रेस नेताओं की ओर से पहले भी प्रतिक्रिया सामने आ चुकी है। अब खुरई से भेजे गए इस खुले पत्र के जरिए कांग्रेस नेता ने भाजपा और संघ के शीर्ष नेतृत्व से बयान पर स्पष्ट जवाब और कार्रवाई की मांग उठाई है।
