गुरुग्राम में कूड़ा प्रबंधन पर बड़ा दांव: 606 करोड़ के टेंडर जारी, 5 साल तक घर-घर होगा कलेक्शन और प्रोसेसिंग सिस्टम मजबूत करने की तैयारी
गुरुग्राम की सफाई व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए नगर निगम ने बड़ा कदम उठाया है। साइबर सिटी में लंबे समय से घरों से कूड़ा उठान की समस्या से जूझ रहे लोगों को राहत देने के लिए 606 करोड़ रुपये के दो बड़े टेंडर जारी किए गए हैं। इन टेंडरों के जरिए डोर-टू-डोर कलेक्शन और कचरे की प्रोसेसिंग व्यवस्था को पूरी तरह व्यवस्थित करने की योजना बनाई गई है।
नगर निगम का दावा है कि स्थायी एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद कचरा प्रबंधन में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा और शहर में गंदगी की समस्या पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।
पांच साल तक लागू रहेगी नई व्यवस्था
नगर निगम ने शहर को चार जोन में बांटकर दो प्रमुख क्लस्टर—क्लस्टर-1 और क्लस्टर-2—के तहत टेंडर प्रक्रिया शुरू की है। इन दोनों क्लस्टरों में कचरा उठान की जिम्मेदारी निजी एजेंसियों को दी जाएगी। इसके लिए पहले दो क्लस्टरों पर 295 करोड़ रुपये और बाकी दो क्लस्टरों पर 311 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह पूरी व्यवस्था पांच साल यानी 1825 दिनों के लिए लागू रहेगी।
स्थायी एजेंसियों से सुधार की उम्मीद
नई व्यवस्था में कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण पर विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग करने की प्रणाली को सख्ती से लागू किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि इससे कचरे का बेहतर प्रबंधन होगा और शहर में प्रदूषण व गंदगी दोनों में कमी आएगी।
साथ ही, बार-बार अस्थायी टेंडर जारी होने, संसाधनों की कमी और कूड़ा उठान में लापरवाही जैसी समस्याओं से भी छुटकारा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
मौजूदा व्यवस्था में कई खामियां
फिलहाल गुरुग्राम में डोर-टू-डोर कलेक्शन पूरी तरह सुचारु नहीं है। यह व्यवस्था अस्थायी टेंडरों के भरोसे चल रही है और शहर में छह एजेंसियां कचरा उठान का काम कर रही हैं। इसके बावजूद 100 प्रतिशत कचरा कलेक्शन नहीं हो पा रहा है।
नतीजतन, लोग मजबूरी में घरों के बाहर और सड़कों के किनारे कचरा फेंक रहे हैं, जिससे शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
पुराने ठेकों पर सवाल, नई प्रक्रिया पर नजर
नगर निगम के पिछले ठेकों को लेकर पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में इस बार जारी किए गए टेंडरों पर भी लोगों की नजरें टिकी हुई हैं। निगम का कहना है कि नई एजेंसियों के जरिए पूरी व्यवस्था को आधुनिक और प्रभावी बनाया जाएगा।
प्रोजेक्ट की मुख्य बातें
606 करोड़ रुपये कुल परियोजना लागत
295 करोड़ रुपये क्लस्टर 1 और 2 के लिए
311 करोड़ रुपये अन्य दो क्लस्टरों के लिए
5 साल (1825 दिन) परियोजना अवधि
22 अप्रैल को टेंडर जारी
13 मई आवेदन की अंतिम तिथि
नई व्यवस्था में क्या बदलेगा
घर-घर से नियमित कचरा उठान सुनिश्चित किया जाएगा
गीले और सूखे कचरे को अलग करने पर जोर रहेगा
कचरे को प्रोसेसिंग प्लांट तक व्यवस्थित तरीके से पहुंचाया जाएगा
शहर की सफाई व्यवस्था को आधुनिक बनाने का दावा किया गया है
नगर निगम गुरुग्राम के एक्सईएन सुंदर श्योराण के अनुसार, नए टेंडरों के माध्यम से डोर-टू-डोर कलेक्शन और कचरा प्रोसेसिंग व्यवस्था को बेहतर और व्यवस्थित किया जाएगा, जिससे शहर की सफाई व्यवस्था में व्यापक सुधार आने की उम्मीद है।
