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डिग्री हो या नौकरी, परिवार की देखभाल करने वाली महिला ‘गृहिणी’ मानी जाएगी, हाईकोर्ट का अहम फैसला

बेंगलुरु: कर्नाटक हाईकोर्ट ने गृहिणी की परिभाषा को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि घर पर परिवार के सदस्यों की देखभाल और सेवा करने वाली महिला को गृहिणी माना जाएगा, भले ही उसके पास उच्च शैक्षणिक डिग्री हो या वह पेशेवर तौर पर काम करती हो। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी महिला को गृहिणी मानने के लिए यह साबित करना जरूरी नहीं है कि वह अनपढ़ है या केवल घर के काम करती है।

सड़क हादसे से जुड़े मुआवजे के मामले में आया फैसला

जस्टिस चिल्लाकुर सुमलता की पीठ ने यह टिप्पणी कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम की बस से जुड़े वर्ष 2013 के सड़क हादसे के मुआवजा मामले की सुनवाई के दौरान की। मामले में बायोटेक्नोलॉजी में स्नातकोत्तर डिग्री रखने वाली एक महिला दुर्घटना में घायल हो गई थी। हादसे के समय वह कथित तौर पर व्याख्याता के तौर पर काम कर रही थी।

महिला ने दुर्घटना के कारण हुई आय की क्षति का हवाला देते हुए मुआवजे में बढ़ोतरी की मांग की थी। हालांकि, बेंगलुरु स्थित मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने उसकी संभावित कमाई के आधार पर मुआवजा देने से इनकार कर दिया था।

परिवहन निगम ने महिला की शिक्षा को बनाया आधार

कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम की ओर से दलील दी गई कि दुर्घटना के समय महिला के नौकरी करने का कोई पुख्ता प्रमाण उपलब्ध नहीं था। निगम ने यह तर्क भी दिया कि महिला उच्च शिक्षित थी, इसलिए उसे केवल गृहिणी के तौर पर नहीं माना जा सकता।

हाईकोर्ट ने परिवहन निगम की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि किसी महिला की शैक्षणिक योग्यता या पेशेवर काम करने का तथ्य उसे गृहिणी की श्रेणी से बाहर नहीं करता, यदि वह अपने परिवार की देखभाल और उसके कल्याण में योगदान देती है।

‘गृहिणी’ मानने के लिए अनपढ़ होना जरूरी नहीं

अदालत ने कहा कि परिवार के सदस्यों की सेवा करने वाली महिला को गृहिणी माना जा सकता है, चाहे उसके पास डिग्री, स्नातकोत्तर डिग्री या डॉक्टरेट की उपाधि ही क्यों न हो। अदालत के मुताबिक, कामकाजी या पेशेवर महिला भी गृहिणी हो सकती है, अगर वह घर पर परिवार की भलाई और देखभाल में योगदान दे रही है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी महिला को गृहिणी साबित करने के लिए यह दिखाना जरूरी नहीं है कि वह अनपढ़ है, चौबीसों घंटे घर के अंदर रहती है या सिर्फ घरेलू काम ही करती है।

होममेकर की भूमिका केवल महिलाओं तक सीमित नहीं

हाईकोर्ट ने गृहिणी शब्द की व्याख्या का दायरा बढ़ाते हुए कहा कि बिना थके परिवार के लिए मेहनत करना, व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं का त्याग करना और परिवार को खुशहाल बनाए रखने में योगदान देना गृहिणी की भूमिका का हिस्सा है।

अदालत ने यह भी कहा कि ‘होममेकर’ शब्द केवल महिलाओं के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। घर चलाने और परिवार की जिम्मेदारियां निभाने वाला व्यक्ति पुरुष हो या महिला, दोनों इस भूमिका में हो सकते हैं। इसमें वह व्यक्ति भी शामिल हो सकता है जो परिवार के लिए आय अर्जित करता है।

महिला को 1.96 लाख रुपये अतिरिक्त मुआवजा

हाईकोर्ट ने महिला के नौकरीपेशा होने का पर्याप्त प्रमाण नहीं मिलने के आधार पर उसकी काल्पनिक मासिक आय 8,000 रुपये तय की। चोटों की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने माना कि उसे कम से कम तीन महीने तक बिस्तर पर आराम करना पड़ा होगा और इस दौरान वह परिवार की देखभाल करने में सक्षम नहीं रही होगी।

इसी आधार पर परिवार की सेवा नहीं कर पाने से हुए नुकसान के लिए 24,000 रुपये निर्धारित किए गए। इसके अलावा, अधिकरण की ओर से पहले तय की गई राशि के ऊपर कुल 1,96,800 रुपये का अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश दिया गया।