सीओ जियाउल हक हत्याकांड में राजा भैया को बड़ी राहत, CBI कोर्ट ने दोबारा जांच की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार की
लखनऊ: प्रतापगढ़ के कुंडा में वर्ष 2013 में हुए चर्चित सीओ जियाउल हक हत्याकांड में पूर्व मंत्री और विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया को अदालत से राहत मिली है। लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने मामले की दोबारा जांच के बाद दाखिल की गई सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली है। अदालत ने राजा भैया के खिलाफ आगे कार्रवाई की मांग भी खारिज कर दी है।
परवीन आजाद की आपत्ति के बाद हुई थी दोबारा जांच
सीओ जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद ने सीबीआई की पहले दाखिल की गई क्लोजर रिपोर्ट का विरोध किया था। उन्होंने राजा भैया समेत अन्य लोगों की भूमिका की दोबारा जांच की मांग की थी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और उसके निर्देश पर सीबीआई ने मामले की फिर से जांच शुरू की।
दोबारा जांच के दौरान राजा भैया की भूमिका समेत मामले से जुड़े अन्य पहलुओं को भी खंगाला गया। जांच पूरी करने के बाद सीबीआई ने दिसंबर 2023 में दोबारा क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की।
जांच में राजा भैया के खिलाफ नहीं मिले पर्याप्त साक्ष्य
सीबीआई की दोबारा जांच में राजा भैया को आरोपी के तौर पर शामिल नहीं किया गया। एजेंसी की रिपोर्ट में उनके खिलाफ अभियोजन चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने की बात कही गई थी।
19 सितंबर 2026 को विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रतिभा सिंह की अदालत ने सीबीआई की अंतिम रिपोर्ट, उपलब्ध दस्तावेजों, विशेषज्ञ राय और जांच से जुड़े रिकॉर्ड का परीक्षण किया। अदालत ने परवीन आजाद की ओर से उठाए गए तर्कों को पर्याप्त आधार नहीं माना और क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली।
कोर्ट ने आगे कार्रवाई की मांग की खारिज
अदालत के इस फैसले के बाद राजा भैया के खिलाफ इस मामले में आगे कानूनी कार्रवाई की मांग खारिज हो गई। यह आदेश राजा भैया की भूमिका और उनके खिलाफ हुई दोबारा जांच से संबंधित है। हत्याकांड के अन्य आरोपितों के खिलाफ हुई कानूनी कार्रवाई इससे अलग है।
2 मार्च 2013 को हुई थी सीओ जियाउल हक की हत्या
सीओ जियाउल हक की हत्या 2 मार्च 2013 को प्रतापगढ़ के कुंडा क्षेत्र के बलीपुर गांव में हुई थी। गांव के प्रधान नन्हे यादव की हत्या के बाद स्थिति बिगड़ गई थी। हालात संभालने के लिए तत्कालीन कुंडा सीओ जियाउल हक मौके पर पहुंचे थे। इसी दौरान भीड़ ने उनकी हत्या कर दी थी।
घटना के बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद ने राजा भैया समेत अन्य लोगों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए शिकायत की थी।
हत्याकांड में 10 आरोपितों को हो चुकी है उम्रकैद
इस हत्याकांड में सीबीआई की विशेष अदालत ने वर्ष 2024 में 10 आरोपितों को दोषी करार दिया था। बाद में सभी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। वहीं एक आरोपित को साक्ष्यों के अभाव में बरी किया गया था।
राजा भैया की भूमिका को लेकर हुई दोबारा जांच में भी सीबीआई को उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। अब अदालत द्वारा क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार किए जाने के बाद इस मामले में उनके खिलाफ आगे कार्रवाई की मांग पर भी विराम लग गया है।
