मध्य प्रदेश

बारिश के साथ रूंझ नदी में उमड़ी हीरे की तलाश, पन्ना में घंटों रेत-मिट्टी छान रहे लोग; बड़े हीरे की उम्मीद बरकरार

पन्ना: मध्य प्रदेश का पन्ना हीरों की धरती के नाम से जाना जाता है। बारिश का मौसम आते ही यहां रूंझ नदी और आसपास के इलाकों में हीरे की तलाश करने वालों की संख्या बढ़ जाती है। पानी उतरने के बाद लोग टोकरी और दूसरे औजार लेकर नदी की रेत-मिट्टी छानते हैं। कई लोग तो नदी किनारे अस्थायी टेंट लगाकर कई दिनों तक अपनी किस्मत आजमाते हैं। उम्मीद रहती है कि मिट्टी और छोटे पत्थरों के बीच कभी चमकदार हीरा हाथ लग जाए।

सालों से बड़े हीरे की तलाश में श्याम बाई

रूंझ नदी पहुंचने वालों में श्याम बाई भी शामिल हैं। वह कई वर्षों से बारिश के मौसम में इस इलाके में हीरे की तलाश के लिए आती हैं। उनके मुताबिक कभी-कभार छोटे-छोटे हीरे मिल जाते हैं, लेकिन अब तक वह उस बड़े हीरे को नहीं खोज पाई हैं, जिसकी उम्मीद उन्हें हर साल नदी तक खींच लाती है।

श्याम बाई कहती हैं, “बड़ा हीरा अब तक नहीं मिला, छोटे-छोटे मिलते हैं।” उनके लिए यह तलाश एक दिन की कोशिश नहीं, बल्कि हर बरसात के साथ लौटने वाली उम्मीद है।

बांदा से मुंबई तक पहुंचते हैं लोग

बारिश के बाद रूंझ नदी की चाल में हीरा मिलने की उम्मीद लेकर इस बार भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। पन्ना के विश्रामगंज रेंज में रूंझ डैम के डूब क्षेत्र के आसपास लोगों की भीड़ दिखाई दी। उत्तर प्रदेश के बांदा के अलावा मध्य प्रदेश के छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ़ और दमोह समेत आसपास के इलाकों से भी लोग यहां पहुंचे।

श्याम बाई के अनुसार गंज बमीठा और मुंबई तक से लोग हीरे की तलाश में रूंझ नदी के आसपास आते हैं। कुछ लोग दिनभर नदी की रेत और मिट्टी छानते हैं, जबकि कुछ लोगों ने किनारे अस्थायी टेंट लगाकर कई दिनों तक रुकने की तैयारी कर रखी थी।

रेत-मिट्टी में तलाशते हैं किस्मत की चमक

हीरे की तलाश करने वालों के लिए नदी की चाल सिर्फ रेत और मिट्टी नहीं है। उन्हें इसी के बीच अपनी किस्मत छिपी नजर आती है। घंटों रेत-मिट्टी छानने के दौरान उम्मीद रहती है कि अगली बार हाथ में कोई चमकदार पत्थर आएगा। छोटा हीरा मिलने पर भी खुशी होती है, जबकि बड़े हीरे की तलाश जिंदगी बदलने की उम्मीद से जुड़ी है।

श्याम बाई भी वर्षों से इसी उम्मीद के साथ नदी तक आती हैं। वह छोटे-छोटे हीरे मिलने की बात बताती हैं, लेकिन इस बार अभी तक उन्हें बड़ा हीरा नहीं मिला है।

वन विभाग ने मौके पर पहुंचकर हटाई भीड़

रूंझ नदी के आसपास बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। जिस क्षेत्र में लोग हीरे तलाश रहे थे, वह वन क्षेत्र के आसपास आता है। वन विभाग के मुताबिक इलाके में जहरीले जीव-जंतुओं के साथ जंगली जानवर भी मौजूद रहते हैं। ऐसे में नदी और जंगल के आसपास बड़ी संख्या में लोगों का जमा होना सुरक्षा के लिहाज से चुनौती बन सकता है।

उत्तर वन मंडल पन्ना के डीएफओ धीरेंद्र प्रताप सिंह के मार्गदर्शन में विश्रामगंज रेंजर राहुल सिंह सिकरवार के नेतृत्व में वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर लोगों को समझाइश दी। इसके बाद नदी किनारे जमा भीड़ को हटाकर क्षेत्र खाली कराया गया और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए निगरानी बढ़ाई गई।

पार्वती कोदर ने बताया, वन अमले ने हटाया

पुराना पन्ना निवासी पार्वती कोदर भी रूंझ नदी में हीरे की तलाश करने पहुंची थीं। उनका कहना है कि वन विभाग के कर्मचारियों ने उन्हें वहां से हटा दिया। इसके चलते वह ज्यादा देर तक तलाश नहीं कर सकीं। उनके मुताबिक उन्होंने केवल पांच ‘तल्ली’ ही खोज पाईं।

रूंझ नदी की यह तस्वीर बताती है कि पन्ना में हीरे की तलाश सिर्फ खदानों तक सीमित नहीं है। बारिश आते ही लोग नदी की चाल में भी अपनी किस्मत तलाशने पहुंच जाते हैं। किसी के लिए यह रोजी-रोटी का सहारा है तो किसी के लिए किस्मत आजमाने का मौका। श्याम बाई जैसे लोगों के लिए यह वर्षों से चली आ रही उम्मीद है।

हालांकि इस तलाश के साथ जोखिम भी जुड़ा है। जंगल और नदी के आसपास लंबे समय तक रहना, वन क्षेत्र में भीड़ जमा करना और वन्यजीवों के बीच जाना सुरक्षा की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसी वजह से वन विभाग ने मौके पर पहुंचकर लोगों को वहां से हटाया।

बड़ा हीरा श्याम बाई को अब तक नहीं मिला है, लेकिन उनकी उम्मीद कायम है। बारिश के बाद नदी की चाल बदलती रहेगी और उसके साथ रेत-मिट्टी में उस एक चमक की तलाश भी जारी रहेगी, जो किसी की किस्मत बदलने का सपना अपने भीतर समेटे है।