आयुष्मान की लिस्ट में 50 हजार मृतक, 1 लाख लोगों ने बदला ठिकाना; सत्यापन के बाद अब कटेंगे नाम
कानपुर: आयुष्मान भारत योजना की पात्रता सूची के जमीनी सत्यापन में कानपुर में चौंकाने वाली स्थिति सामने आई है। स्वास्थ्य विभाग की टीम जब लाभार्थियों के कार्ड बनाने के लिए घर-घर पहुंची तो करीब 50 हजार नाम ऐसे मिले, जिनकी मौत हो चुकी है। वहीं लगभग एक लाख लोग दर्ज पते पर नहीं मिले। कई लोगों ने वर्षों पहले अपना घर और मोहल्ला बदल लिया, जबकि कुछ नाम ऐसे भी सामने आए जिनके बारे में स्थानीय लोगों ने बताया कि संबंधित व्यक्ति वहां कभी रहा ही नहीं।
कानपुर में करीब 13 लाख 3 हजार 237 लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाए जाने हैं। अब तक करीब 9 लाख 50 हजार 211 लोगों के कार्ड बन चुके हैं। विभाग लक्ष्य पूरा करने में जुटा है, लेकिन पात्रता सूची में दर्ज मृतकों और पुराने पते पर नहीं रहने वाले लोगों के कारण शत प्रतिशत लक्ष्य हासिल करना चुनौती बन गया है।
घर-घर सत्यापन में खुली सूची की हकीकत
स्वास्थ्य विभाग की टीमें आयुष्मान योजना की सूची लेकर लाभार्थियों के पते पर पहुंच रही हैं। कई घरों में संबंधित लाभार्थी के बजाय परिवार के दूसरे सदस्य मिले। पूछताछ में पता चला कि लाभार्थी की कई साल पहले मौत हो चुकी है। कुछ स्थानों पर टीम को बंद दरवाजे मिले, जबकि कई पते पर दूसरे परिवार रह रहे थे। पड़ोसियों से जानकारी लेने पर पता चला कि संबंधित लोग पांच से दस साल पहले ही वहां से जा चुके हैं।
अब मृतक और अपात्रों के नाम हटेंगे
आयुष्मान योजना की पात्रता सूची को दुरुस्त करने के लिए शासन ने सत्यापन के बाद नाम हटाने की व्यवस्था की है। नोडल अधिकारी को मृतक, अपात्र और गलत पते पर दर्ज लोगों के नाम सूची से हटाने का अधिकार दिया गया है। सीएचसी और शहरी स्वास्थ्य केंद्र ऐसे लाभार्थियों की सूची तैयार कर सीएमओ कार्यालय भेजेंगे। जांच के बाद संबंधित नामों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
सीएचसी और शहरी स्वास्थ्य केंद्र एल-1 आईडी के माध्यम से मृतकों और निर्धारित पते पर नहीं मिलने वाले लाभार्थियों के नाम नोडल अधिकारी को भेजेंगे। इसके बाद नोडल अधिकारी एल-2 आईडी के माध्यम से इन नामों को सांची कार्यालय, लखनऊ भेजेंगे। सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सूची को अपडेट किया जाएगा।
पता बदलने वालों के सामने भी बढ़ेगी परेशानी
इस कार्रवाई का असर उन लोगों पर भी पड़ सकता है जो योजना के पात्र हैं, लेकिन अपना पुराना पता छोड़ चुके हैं। यदि सत्यापन के दौरान उनका नाम सूची से हटा दिया जाता है तो भविष्य में उसी सूची के आधार पर उन्हें आयुष्मान योजना का लाभ मिलने में परेशानी हो सकती है। ऐसे में केवल घर बदलना ही नहीं, बल्कि योजना की पात्रता सूची में अपना विवरण सही रखना भी जरूरी हो जाएगा।
मछरिया और ग्वालटोली में भी सामने आए मामले
मछरिया में स्वास्थ्य विभाग की टीम सूची में दर्ज पते पर एक लाभार्थी का कार्ड बनाने पहुंची। वहां परिवार के अन्य सदस्य मिले और पूछताछ में पता चला कि संबंधित व्यक्ति की कई साल पहले ही मौत हो चुकी है। परिवार के लोग भी इस बात से हैरान थे कि मृतक का नाम अब तक पात्रता सूची में दर्ज है।
इसी तरह ग्वालटोली में टीम एक लाभार्थी के पुराने पते पर पहुंची तो वहां कोई दूसरा परिवार रह रहा था। आसपास के लोगों से जानकारी लेने पर पता चला कि संबंधित व्यक्ति करीब 10 साल पहले मकान छोड़ चुका है। उसका वर्तमान पता किसी को मालूम नहीं था। इसके बाद टीम बिना कार्ड बनाए वापस लौट गई।
13 लाख से ज्यादा लोगों के कार्ड का लक्ष्य
कानपुर में आयुष्मान योजना के तहत कुल 13 लाख 3 हजार 237 लोगों के कार्ड बनाए जाने का लक्ष्य है। इनमें से अब तक करीब 9 लाख 50 हजार 211 लोगों को योजना का लाभ मिल चुका है। शेष लाभार्थियों तक पहुंचने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार सत्यापन और कार्ड बनाने का काम कर रही हैं। लेकिन सूची में बड़ी संख्या में मृतकों और पुराने पते पर नहीं रहने वाले लोगों के नाम दर्ज होने से विभाग के सामने लक्ष्य पूरा करने की चुनौती बनी हुई है।
