650वीं जयंती वर्ष पर बड़ा ऐलान: संत रविदास के सम्मान में सार्वजनिक अवकाश, राज्य पुरस्कार और नवा रायपुर में होगा नामकरण
रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज की 650वीं जयंती वर्ष के अवसर पर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि संत रविदास ने समरसता, समानता, भक्ति, श्रम और सामाजिक न्याय का जो मार्ग दिखाया, वही विकसित, समरस और सशक्त भारत की आधारशिला है। राजधानी रायपुर के दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित कलश वंदन महाअभियान के दौरान मुख्यमंत्री ने वाराणसी के सीर गोवर्धनपुर स्थित संत रविदास की जन्मस्थली से लाए गए पवित्र मिट्टी और जल से भरे कलश का विधिवत पूजन कर उसे सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताया।
संत रविदास के सम्मान में कई बड़ी घोषणाएं
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने घोषणा की कि वर्ष 2027 में संत रविदास जयंती (माघी पूर्णिमा) के अवसर पर पूरे प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश रहेगा। इस दिन राज्यभर में मांस और मदिरा की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस पर दिए जाने वाले राज्य अलंकरण पुरस्कारों में संत शिरोमणि गुरु रविदास के नाम से एक नया राज्य अलंकरण पुरस्कार शुरू किया जाएगा। नवा रायपुर के एक प्रमुख चौक का नाम भी संत गुरु रविदास के नाम पर रखा जाएगा।
विधानसभा में अंकित कराने का होगा प्रयास
मुख्यमंत्री ने कहा कि संत रविदास के प्रसिद्ध संदेश “ऐसा चाहूं राज मैं, जहाँ मिले सबन को अन्न। छोट-बड़ो सब सम बसैं, रविदास रहैं प्रसन्न।।” को छत्तीसगढ़ विधानसभा में अंकित कराने के लिए विधानसभा अध्यक्ष से चर्चा कर प्रयास किया जाएगा।
समाज को नई दिशा देने वाले संत थे रविदास
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत संतों और महापुरुषों की भूमि है। जब-जब समाज में अन्याय, भेदभाव और छुआछूत जैसी विकृतियां बढ़ीं, तब-तब संतों ने समाज को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि संत रविदास ने समानता, सामाजिक समरसता और सच्ची भक्ति का संदेश देकर समाज को नई चेतना प्रदान की। उन्होंने यह भी कहा कि संत रविदास ने तत्कालीन शासक सिकंदर लोदी के धर्मांतरण के दबाव का साहसपूर्वक विरोध किया और सभी मनुष्यों की समानता का संदेश दिया। उनका संदेश “मन चंगा तो कठौती में गंगा” आज भी लोगों को आंतरिक शुद्धता और आध्यात्मिकता का मार्ग दिखाता है।
‘विकास भी, विरासत भी’ की सोच को बताया मार्गदर्शक
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के मंत्र पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि “विकास भी, विरासत भी” की सोच देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर के संरक्षण की दिशा तय कर रही है। संत रविदास की जन्मभूमि से लाए गए पवित्र कलश देशभर के मठों, मंदिरों और आस्था केंद्रों तक पहुंचाए जा रहे हैं, जिससे सामाजिक समरसता का संदेश जन-जन तक पहुंचेगा।
जिलों के प्रतिनिधियों को सौंपे गए पवित्र कलश
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सीर गोवर्धनपुर से पवित्र कलश लेकर आए प्रतिनिधिमंडल की सराहना की और सभी जिलों से आए प्रतिनिधियों को कलश सौंपे। उन्होंने गांव-गांव तक इन्हें पहुंचाने वाले वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और विश्वास जताया कि यह अभियान सामाजिक एकता और समरसता को मजबूत करेगा।
अन्य वक्ताओं ने भी रखे विचार
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि संत रविदास का जीवन सामाजिक समानता और एकता की प्रेरणा देता है। अजय जामवाल ने कहा कि समरसता भारत की सबसे बड़ी शक्ति है और संत रविदास का संदेश आज भी पूरी दुनिया के लिए प्रासंगिक है। सरोज पाण्डेय ने कहा कि संत रविदास के विचार समाज को नई दिशा देने वाले हैं और उनके संदेश को जन-जन तक पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु रहे मौजूद
कार्यक्रम में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, विधायक अनुज शर्मा, विधायक मोतीलाल साहू, विधायक इंद्र कुमार साहू, विधायक संपत अग्रवाल, विधायक रोहित साहू, छत्तीसगढ़ चर्म शिल्पकार बोर्ड के अध्यक्ष ध्रुव कुमार मिर्धा, गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष राजीव लोचन महाराज, महंत खेलुराम पैगवार, संत युधिष्ठिर लाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि, संत समाज के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
