बैंक में चली गोली ने उजाड़ दिया परिवार! PF का पैसा निकालने गए युवक की मौत, 5 बहनों का इकलौता भाई था मनीष
नई दिल्ली: पश्चिमी दिल्ली में बैंक के भीतर सुरक्षा गार्ड की बंदूक से चली गोली लगने से जान गंवाने वाले मनीष की मौत से ईसापुर गांव में शोक की लहर है। परिवार और ग्रामीणों के अनुसार मनीष अपनी पांच बहनों का इकलौता भाई और बुजुर्ग माता-पिता का एकमात्र सहारा था। वह अपने ईपीएफ का पैसा निकालने के लिए बैंक गया था, जहां यह हादसा हो गया।
ग्रामीणों का कहना है कि परिवार ने लंबे समय तक बेटे की कामना की थी। मनीष के जन्म के बाद परिवार की यह इच्छा पूरी हुई थी, लेकिन अब उसकी असमय मौत से पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।
ईपीएफ का पैसा निकालने बैंक गया था मनीष
मनीष के मित्र विक्की के अनुसार वह दिल्ली मेट्रो में संविदा के आधार पर टोकन ऑपरेटर के रूप में कार्यरत था। करीब पांच महीने पहले उसकी नौकरी समाप्त हो गई थी। नौकरी के दौरान ईपीएफ में जमा राशि निकालने के लिए वह अपने घर से करीब 500 मीटर दूर स्थित बैंक शाखा पहुंचा था।
बैंक में उसे बताया गया कि ईपीएफ रिकॉर्ड में दर्ज नाम और उसके दस्तावेजों में अंतर है। इस त्रुटि को सुधारने के लिए उसे एक फॉर्म भरने के लिए कहा गया। वह बैंक परिसर में फॉर्म भर रहा था, तभी यह हादसा हो गया।
बंदूक में गोली भरते समय चला फायर
बताया गया कि उसी दौरान बैंक का सुरक्षा गार्ड अपनी बंदूक में गोली लोड कर रहा था। इसी प्रक्रिया के दौरान अचानक गोली चल गई, जो मनीष की कमर में लगी। गोली लगते ही बैंक में अफरा-तफरी मच गई। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
ग्रामीणों ने उठाए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
घटना के बाद ग्रामीणों ने बैंक की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि सुरक्षा गार्ड बैंक में कुछ ही दिन पहले तैनात हुआ था।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि गार्ड हथियार में गोली भर रहा था तो यह कार्य बैंक के सार्वजनिक हाल में नहीं होना चाहिए था, जहां ग्राहक और कर्मचारी मौजूद थे। उनका सवाल है कि ऐसी प्रक्रिया किसी सुरक्षित और अलग स्थान पर क्यों नहीं की गई तथा इस स्तर की लापरवाही कैसे हुई।
बुजुर्ग माता-पिता का छिन गया सहारा
मनीष के पिता वर्ष 2011 में दिल्ली परिवहन निगम में सहायक फोरमैन के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। परिवार में पांचों बेटियों की शादी हो चुकी है, जबकि मनीष अविवाहित था। ग्रामीणों का कहना है कि उसकी मौत के बाद बुजुर्ग माता-पिता ने अपना इकलौता सहारा खो दिया है।
