MP Doctors Strike: मध्य प्रदेश में 8000 जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर, ओपीडी सेवाओं पर मंडराया असर का खतरा
भोपाल: मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत करीब 8000 जूनियर डॉक्टर स्टाइपेंड में महंगाई भत्ते के संशोधन की मांग को लेकर हड़ताल पर चले गए हैं। हड़ताल के पहले दिन डॉक्टरों ने नियमित ओपीडी सेवाओं से दूरी बनाई है। हालांकि मरीजों को ज्यादा परेशानी न हो, इसके लिए समानांतर ओपीडी की व्यवस्था कर स्वास्थ्य सेवाएं जारी रखने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल हड़ताल का पहला दिन होने की वजह से मरीजों को सीमित स्तर पर ही दिक्कतें सामने आ रही हैं, लेकिन कुछ मरीजों ने इलाज प्रभावित होने की शिकायत भी की है।
एक डायलिसिस मरीज ने नाराजगी जताते हुए कहा कि हड़ताल की वजह से उसका निर्धारित डायलिसिस नहीं हो पाया, जिससे उसे परेशानी का सामना करना पड़ा।
जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन ने रखी ये मांग
जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन का कहना है कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता, तब तक वे नियमित ओपीडी सेवाएं नहीं देंगे। हड़ताल के दौरान कई जूनियर डॉक्टर हमीदिया अस्पताल परिसर में टेंट लगाकर प्रतीकात्मक ओपीडी संचालित कर रहे हैं और अपनी मांगों के समर्थन में विरोध दर्ज करा रहे हैं।
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉक्टर महेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित स्टाइपेंड संशोधन 1 अप्रैल 2025 से लागू होना था, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया है। उनका कहना है कि इसी अवधि से लंबित एरियर के भुगतान को लेकर भी सरकार की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है, जिससे डॉक्टरों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
अभी सीनियर डॉक्टर संभाल रहे जिम्मेदारी
फिलहाल अस्पतालों में सेवाएं पूरी तरह ठप नहीं हुई हैं। सीनियर डॉक्टर ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जिससे पहले दिन स्वास्थ्य सेवाओं पर ज्यादा असर दिखाई नहीं दे रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हड़ताल लंबी चली तो अस्पतालों की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और ओपीडी सेवाएं चरमरा सकती हैं।
मेडिकल कॉलेजों में अहम भूमिका निभाते हैं जूनियर डॉक्टर
जानकारों के मुताबिक किसी भी मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टरों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। अस्पतालों के रोजमर्रा के कामकाज का लगभग 60 से 70 फीसदी हिस्सा इन्हीं डॉक्टरों के जिम्मे होता है। ऐसे में यदि उनकी हड़ताल लंबी अवधि तक जारी रहती है तो मरीजों को इलाज के लिए गंभीर मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है और कई मामलों में जोखिम भी बढ़ सकता है।
गौरतलब है कि जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के नेतृत्व में राज्यभर के डॉक्टरों ने शुक्रवार से शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन शुरू किया है। डॉक्टर काली पट्टी बांधकर काम कर रहे हैं और अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं। अब देखना होगा कि सरकार डॉक्टरों की मांगों पर क्या फैसला लेती है और यह विरोध प्रदर्शन आगे किस दिशा में बढ़ता है।
