झारखंड में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की तैयारी, रिकॉर्ड खंगालेगा विभाग; 50 हजार एकड़ जमीन पर कब्जे का अनुमान
रांची। झारखंड में वन भूमि पर बढ़ते अतिक्रमण को लेकर वन एवं पर्यावरण विभाग ने सख्त कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। विभाग ने राज्यभर में वन भूमि से अवैध कब्जा हटाने के लिए अभिलेखों का विस्तृत अध्ययन कराने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही सभी क्षेत्रीय अधिकारियों से अतिक्रमण से जुड़ी रिपोर्ट भी मांगी गई है।
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार राज्य में करीब 50 हजार एकड़ वन भूमि पर अतिक्रमण या अवैध कब्जे का अनुमान है। हालांकि वन विभाग अपने आकलन में करीब 32 हजार एकड़ जमीन पर अतिक्रमण होने की बात स्वीकार कर रहा है।
हाल के समय में वन भूमि के अवैध हस्तांतरण, खेती के लिए जंगलों को साफ करने और सड़क किनारे दुकानों के निर्माण के कारण अतिक्रमण के मामलों में तेजी आई है। रांची के कांके अंचल से सटे वन क्षेत्र में भी हाल ही में स्थानीय अंचलाधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई थी।
हाइवे किनारे बने रिसॉर्ट और दुकानों पर भी नजर
वन विभाग को राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे बने कई रिसॉर्ट और दुकानों द्वारा वन भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायतें भी मिली हैं। इन मामलों की भी जांच की जा रही है और संबंधित अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है।
वन प्रबंधन समितियों को मजबूत कर रोकेंगे अतिक्रमण
अतिक्रमण पर नियंत्रण के लिए वन एवं पर्यावरण विभाग ने स्थानीय स्तर पर वन प्रबंधन समितियों को मजबूत करने का फैसला किया है। इसके तहत वन क्षेत्रों के आसपास बसे गांवों के निवासियों को समिति में शामिल किया जाएगा, ताकि जमीन पर होने वाली गतिविधियों की जानकारी समय पर मिल सके और अतिक्रमण को रोका जा सके।
विभाग की योजना है कि इन समितियों को पौधरोपण और वन संरक्षण से जोड़कर स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी विकसित किए जाएं।
वन भूमि का लैंडबैंक भी तैयार करेगा विभाग
वन एवं पर्यावरण विभाग अपनी जमीन का एक व्यवस्थित लैंडबैंक भी तैयार करेगा। इसके लिए वन भूमि से जुड़े सभी अभिलेखों का अध्ययन कर उनका डिजिटल और दस्तावेजी रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। विभाग की दस वर्षीय कार्ययोजना के तहत इस लैंडबैंक का उपयोग पौधरोपण के साथ-साथ संरचनात्मक विकास की योजनाओं में किया जाएगा।
