राम मंदिर में नवसंवत्सर पर भव्य आयोजन: 5000 अतिथियों की मौजूदगी, राष्ट्रपति के आगमन से पहले होगा विशेष अनुष्ठान
अयोध्या। रामजन्मभूमि परिसर में वर्ष प्रतिपदा के अवसर पर आयोजित होने वाले नवसंवत्सर समारोह को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इस विशेष आयोजन से पहले राम मंदिर में एक दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किया जाएगा, जो उसी दिन सुबह 8 बजे से शुरू होकर पूर्वाह्न 11 बजे तक चलेगा। इस अनुष्ठान का नेतृत्व काशी के विख्यात आचार्य गणेश्वर द्रविड़ शास्त्री करेंगे, जिन्होंने रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का शुभ मुहूर्त भी निर्धारित किया था। उनके साथ दक्षिण भारत के कई आचार्य भी अनुष्ठान में सहभागी रहेंगे।
अनुष्ठान की पूर्णाहुति के बाद देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु राम मंदिर के द्वितीय तल पर स्थापित होने वाले श्रीरामयंत्र और रामनाम मंदिर की स्थापना करेंगी। इसके पश्चात वह नवसंवत्सर समारोह में शामिल होकर मंदिर निर्माण से जुड़े कर्मयोगियों को सम्मानित करेंगी और उपस्थित जनसमूह को संबोधित भी करेंगी।
रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से यह नवसंवत्सर समारोह 19 मार्च को आयोजित किया जा रहा है। मंदिर निर्माण कार्य के पूर्ण होने के बाद इसमें उन शिल्पियों और कर्मयोगियों को सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने इस ऐतिहासिक परियोजना में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ट्रस्ट की ओर से सम्मानित किए जाने वाले कर्मयोगियों की सूची तैयार कर ली गई है और उन्हें उनके परिजनों के साथ समारोह में आमंत्रित किया गया है।
इस आयोजन में मंदिर आंदोलन से जुड़े सक्रिय कार्यकर्ताओं और विभिन्न पदाधिकारियों को भी आमंत्रण भेजा जा रहा है। समारोह में लगभग पांच हजार लोगों के शामिल होने की संभावना है और आयोजन स्थल पर इसी संख्या के अनुसार बैठने की व्यवस्था की जाएगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का कार्यक्रम लगभग डेढ़ से दो घंटे का रहने की संभावना है और वह पूर्वाह्न करीब 11 बजे रामजन्मभूमि परिसर पहुंचेंगी।
समारोह को और अधिक गरिमामय बनाने के लिए ट्रस्ट की ओर से दक्षिण भारत के कई प्रमुख धर्मगुरुओं को भी आमंत्रित करने की योजना है। इसके अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले, सरकार्यवाह सुरेश भैया जी जोशी समेत अन्य प्रमुख पदाधिकारियों के भी कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि ट्रस्ट ने अभी आयोजन की विस्तृत रूपरेखा और सभी अतिथियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं।
रामनाम मंदिर में सुरक्षित होंगी रामायण से जुड़ी प्राचीन धरोहरें
राम मंदिर के द्वितीय तल पर स्थापित होने वाले रामनाम मंदिर में देशभर से राम और रामायण से संबंधित प्राचीन कृतियों और पांडुलिपियों को संरक्षित करने की योजना बनाई गई है। यहां इन दुर्लभ धरोहरों को सुरक्षित रखने के साथ ही आम लोगों के लिए प्रदर्शित भी किया जाएगा।
ट्रस्ट को केंद्रीय संस्कृति विश्वविद्यालय की ओर से वाल्मीकि रचित रामायण की एक प्राचीन प्रति प्राप्त हो चुकी है। इसके अलावा देश के कई अन्य स्थानों से भी प्राचीन पांडुलिपियां उपलब्ध कराने के प्रस्ताव मिले हैं। हालांकि ट्रस्ट इन पांडुलिपियों को स्वीकार करने से पहले उनकी प्राचीनता और प्रामाणिकता का परीक्षण भी करवा रहा है।
