उत्तर प्रदेश

22 दोषियों को फांसी सुना चुके जज रवि कुमार दिवाकर की कोर्ट से 100 मुकदमे ट्रांसफर, इन कुख्यात अपराधियों के केस भी शामिल

मुजफ्फरनगर: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में पांच महीने के भीतर नौ मामलों में 22 दोषियों को फांसी की सजा सुनाने वाले अपर जिला जज एवं सत्र न्यायालय फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर एक बार फिर चर्चा में हैं। उनकी अदालत में लंबित करीब 100 मुकदमों को जिला जज बीरेंद्र कुमार सिंह ने रिकॉल कर दूसरे न्यायालयों में स्थानांतरित कर दिया है। इन मामलों में कुख्यात बदमाश सुशील मूंछ, शौकीन गैंग और चीनू पंडित से जुड़े हत्या समेत अन्य गंभीर आपराधिक मामले भी शामिल हैं।

जज रवि कुमार दिवाकर ने पिछले करीब पांच महीनों में नौ अलग-अलग मामलों में 22 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। इन मामलों में हत्या सहित कई गंभीर आपराधिक प्रकरण शामिल रहे हैं। लगातार कठोर फैसलों के बीच अब उनकी अदालत से करीब 100 मुकदमे वापस लिए जाने की जानकारी सामने आई है।

बताया जा रहा है कि जिला जज ने इन मुकदमों को रिकॉल करने के बाद दूसरे न्यायालयों में स्थानांतरित कर दिया है। हालांकि, मुकदमों को दूसरी अदालतों में भेजने का प्रशासनिक या न्यायिक आधार अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। गंभीर आपराधिक मामलों में त्वरित सुनवाई और दोष सिद्ध होने पर कड़ी सजा दिए जाने के कारण न्यायाधीश दिवाकर की अदालत की चर्चा मुजफ्फरनगर के साथ पूरे उत्तर प्रदेश में हुई है।

दो दशक पुराने मामलों की भी हो रही थी सुनवाई

फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 में वर्ष 2007 से लेकर 2026 तक के हत्या से जुड़े कई पुराने मुकदमों की सुनवाई चल रही थी। इनमें वर्ष 2007, 2011, 2013, 2014, 2015-16, 2017, 2019-2020 और 2026 के मामले शामिल बताए गए हैं।

इन मामलों में कुख्यात बदमाश सुशील मूंछ के खिलाफ दर्ज करीब 10 से 12 हत्या के मुकदमे भी शामिल होने की बात सामने आई है। शौकीन गैंग के सदस्य और उसके भाई शाहनवाज को हाल ही में फांसी की सजा सुनाई गई थी। इसके अलावा बागपत में एसटीएफ मेरठ की कार्रवाई में मारे गए बदमाश विपुल खूनी से जुड़े मुकदमे की सुनवाई भी इसी अदालत में चल रही थी। एक अन्य हत्या मामले में आरोपी चीनू पंडित का मुकदमा भी विचाराधीन था।

सुरक्षा को लेकर पहले जता चुके हैं चिंता

जज रवि कुमार दिवाकर इससे पहले अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जाहिर कर चुके हैं। उन्होंने पुलिस महानिदेशक को पत्र भेजकर आरोप लगाया था कि उनकी सुरक्षा में तैनात गनर को उनकी सहमति और जानकारी के बिना बदल दिया गया। न्यायाधीश ने गनर बदले जाने को अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिहाज से गंभीर मामला बताते हुए इस संबंध में कार्रवाई की मांग की थी।