उत्तर प्रदेश

जेवर एयरपोर्ट के पास बनेगी ताइवान सिटी, मेडिकल हब को भी मंजूरी; यीडा के इन सेक्टरों में मिलेंगे प्लॉट

ग्रेटर नोएडा: जेवर एयरपोर्ट के पास यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में ताइवान सिटी और मेडिकल हब विकसित करने की तैयारी तेज हो गई है। यीडा की बोर्ड बैठक में दोनों परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। सेक्टर-6 में 300 एकड़ जमीन पर ताइवान आधारित कंपनियों के लिए प्लॉट आवंटित किए जाएंगे, जबकि सेक्टर-13 और 14 में 500 एकड़ में मेडिकल कंपनियों के लिए भूमि उपलब्ध कराई जाएगी।

सोमवार को यमुना विकास प्राधिकरण के सभागार में अपर मुख्य सचिव आलोक सिंह की अध्यक्षता में बोर्ड बैठक हुई। बैठक में यीडा के सीईओ आरके सिंह, एसीईओ शैलेंद्र भाटिया समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में ताइवान सिटी के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। ताइवान इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी और उच्च तकनीक विनिर्माण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। ऐसे में यहां ताइवान आधारित कंपनियों के आने से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और तकनीकी उत्पादों से जुड़े उद्योगों का बड़ा समूह विकसित होने की उम्मीद है।

इस परियोजना से निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होने के साथ स्थानीय छोटे और मध्यम उद्योगों को भी वैश्विक कंपनियों की आपूर्ति शृंखला से जुड़ने का मौका मिलेगा। कच्चे माल से लेकर तैयार उत्पाद तक का औद्योगिक तंत्र विकसित होने से यीडा क्षेत्र की औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

यमुना सिटी में बनेगा फार्मा विनिर्माण क्लस्टर

उत्तर प्रदेश को फार्मा विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए यमुना सिटी के सेक्टर-6 में 100 से 125 एकड़ जमीन पर औषधि निर्माण क्लस्टर विकसित किया जाएगा। इसमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप दवाओं का उत्पादन करने वाली कंपनियों को जमीन आवंटित की जाएगी।

क्लस्टर में टैबलेट, कैप्सूल, इंजेक्शन, सिरप और त्वचा या आंखों पर इस्तेमाल होने वाली दवाओं जैसे क्रीम, जेल, लोशन और मलहम के निर्माण से जुड़ी इकाइयां स्थापित की जाएंगी।

मेडिकल डिवाइस की जांच के लिए बनेगी परीक्षण सुविधा

यीडा के मेडिकल डिवाइस पार्क में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप चिकित्सा उपकरणों की जांच के लिए परीक्षण सुविधा स्थापित करने का प्रस्ताव भी मंजूर किया गया है। इसके तकनीकी, वित्तीय और संस्थागत पहलुओं की जांच के लिए तकनीकी विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाएगा।

अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल भारतीय चिकित्सा उपकरण निर्माताओं को उत्पादों की जांच और अनुरूपता मूल्यांकन के लिए विदेश स्थित प्रयोगशालाओं पर निर्भर रहना पड़ता है। नई सुविधा बनने के बाद चिकित्सा उपकरण निर्माता और एमएसएमई को देश में ही अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप परीक्षण की सुविधा मिल सकेगी।

इस केंद्र पर विद्युत सुरक्षा, विद्युतचुंबकीय अनुकूलता, यांत्रिक प्रदर्शन, सॉफ्टवेयर सत्यापन, कीटाणुशोधन और पैकेजिंग सत्यापन जैसी जांच सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

सेक्टर-34 में 36 एकड़ में बनेगी मंडी

यीडा के सेक्टर-34 में करीब 36 एकड़ जमीन पर मंडी स्थापित करने की योजना को भी मंजूरी दी गई है। यह मंडी नोएडा फेज-1 स्थित फूल मंडी की तर्ज पर विकसित की जाएगी। इसके अलावा सेक्टर-14 में 480 एकड़ में यूनिवर्सिटी पार्क बनाया जाएगा, जहां देश-विदेश के बड़े विश्वविद्यालयों को जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। सेक्टर-23डी में 50 एकड़ जमीन पर अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम बनाने की भी योजना है।

इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाकर 500 करने का आदेश

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो को देखते हुए तीनों प्राधिकरण क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाने का फैसला लिया गया है। अभी 100 इलेक्ट्रिक बसें चल रही हैं, जिनकी संख्या बढ़ाकर 500 की जाएगी। इसके लिए अपर मुख्य सचिव की ओर से तीनों प्राधिकरणों को अलग से पत्र जारी किया गया है। इसके साथ ही यीडा के सेक्टर-23सी में अंतरराज्यीय बस अड्डे को भी मंजूरी दी गई है।

मेडिकल हब के लिए विश्व बैंक से मांगी जा सकती है मदद

मेडिकल हब में अस्पताल, क्लीनिक, अनुसंधान एवं परीक्षण केंद्र, डिजिटल स्वास्थ्य केंद्र, जैव प्रौद्योगिकी एवं फार्मा केंद्र, स्वास्थ्य एवं वृद्धावस्था केंद्र और नर्सिंग सुविधाओं के लिए जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। परियोजना की प्रारंभिक रिपोर्ट भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग को भेजने और विश्व बैंक से 3000 करोड़ रुपये की आईबीआरडी वित्तीय सहायता लेने के प्रस्ताव पर भी विचार किया गया।

करबन नदी पर पुल बनाने की तैयारी

आगरा स्थित यीडा क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेसवे की चैनेज 161.21 पर सर्विस रोड के लिए करबन नदी के ऊपर कलवर्ट यानी छोटे पुल के निर्माण को मंजूरी दी गई है। बारिश के दौरान यहां जलभराव के कारण सर्विस रोड पर आवागमन प्रभावित होता है। पुल बनने के बाद इस समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है।

भूमि खरीद पर 1385 करोड़ रुपये खर्च

यमुना प्राधिकरण के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में भूमि खरीद समेत अन्य मदों में 1308.57 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। वित्त वर्ष 2026-27 में 31 जुलाई तक कुल 3690.64 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। इसमें अकेले भूमि खरीद पर 1385 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।