बिहार में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा: मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना में दूसरी किस्त जल्द, अब 10 हजार नहीं बल्कि ₹20 हजार की मिलेगी मदद
गया जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत लाभान्वित महिलाओं को जल्द ही दूसरी किस्त जारी करने की तैयारी तेज हो गई है। इस योजना के जरिए स्वरोजगार शुरू करने वाली महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का प्रयास किया जा रहा है। संबंधित विभाग ने सभी जिलों को पात्र लाभुकों की पहचान कर प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दे दिए हैं।
जिला स्तर पर तेज हुई प्रक्रिया, अधिकारियों को दिए गए निर्देश
बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति की ओर से जारी निर्देशों के बाद जिला परियोजना प्रबंधक आचार्य मम्मट ने वर्चुअल बैठक कर जिला और प्रखंड स्तर के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि पात्र महिलाओं का चयन कर उनका विवरण जल्द भेजा जाए, ताकि भुगतान प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।
पहली किस्त के बाद अब दूसरी किस्त में ₹20 हजार
योजना के तहत पहले चरण में लाभुक महिलाओं को 10,000 रुपये की राशि दी जा चुकी है। अब निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाली महिलाओं को दूसरी किस्त के रूप में 20,000 रुपये प्रदान किए जाएंगे। यह राशि महिलाओं को उनके स्वरोजगार को आगे बढ़ाने में मदद करेगी।
इन शर्तों को पूरा करना होगा अनिवार्य
दूसरी किस्त प्राप्त करने के लिए लाभुकों को कुछ आवश्यक शर्तें पूरी करनी होंगी। इसमें दी गई राशि का सही उपयोग, एमआईएस में प्रविष्टि, वित्तीय साक्षरता प्रशिक्षण लेना, समूह बैठकों में नियमित भागीदारी, बचत की आदत बनाए रखना और एक स्पष्ट व्यवसायिक योजना तैयार करना शामिल है।
तीन चरणों में होगा भुगतान, सीधे खाते में जाएगी राशि
द्वितीय किस्त का भुगतान तीन चरणों में किया जाएगा। पहले ग्राम संगठन द्वारा सत्यापन किया जाएगा, इसके बाद प्रखंड स्तर पर मूल्यांकन होगा। अंतिम चरण में डीबीटी के माध्यम से राशि सीधे लाभुकों के बैंक खाते में भेजी जाएगी।
लाखों महिलाओं को मिल चुका है लाभ
जिले में अब तक 6 लाख 89 हजार से अधिक महिलाओं को 10,000 रुपये की प्रारंभिक सहायता दी जा चुकी है। आगे की प्रक्रिया के तहत पात्र लाभुकों को चरणबद्ध तरीके से पांच चरणों में कुल 2 लाख 10 हजार रुपये तक की सहायता दी जाएगी, जिसमें लाभुक का अंशदान भी शामिल रहेगा।
स्वरोजगार के जरिए महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर
योजना के तहत महिलाएं फल-सब्जी की दुकान, किराना, सिलाई, नाश्ता दुकान, पशुपालन और कृषि जैसे विभिन्न कार्यों से अपनी आजीविका चला रही हैं। यह पहल न सिर्फ आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा दे रही है, बल्कि ग्रामीण स्तर पर आत्मनिर्भरता की दिशा में भी अहम भूमिका निभा रही है।
