भरत तिवारी एनकाउंटर केस में नया विवाद! न्यायिक आयोग पर उठे सवाल, परिवार बोला- रिटायर्ड जज नहीं, CBI या सीटिंग जज करें जांच
आरा: बिहार के भोजपुर जिले में चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में एक बार फिर नया मोड़ आ गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा गठित न्यायिक आयोग की जांच पर अब खुद मृतक के परिजनों ने सवाल खड़े कर दिए हैं। भरत तिवारी की मां आशा देवी और भाई चंदन तिवारी ने साफ कहा है कि उन्हें हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अगुवाई में हो रही जांच पर भरोसा नहीं है। परिवार ने मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) या किसी कार्यरत न्यायाधीश से कराने की मांग की है।
न्यायिक आयोग पर परिजनों ने जताई नाराजगी
भरत तिवारी के परिजनों का कहना है कि रिटायर्ड जज के नेतृत्व में होने वाली जांच से उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है। परिवार का आरोप है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच किसी स्वतंत्र और उच्चस्तरीय एजेंसी या सीटिंग जज से कराई जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने शाहाबाद के डीआईजी और भोजपुर के एसपी को पद से हटाने की भी मांग उठाई है।
राज्य सरकार ने इस मामले की जांच के लिए पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग का गठन किया था। आयोग के प्रमुख ने हाल ही में शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव पहुंचकर परिजनों से मुलाकात भी की थी।
मां बोलीं- बयान दर्ज होंगे, लेकिन न्याय की उम्मीद नहीं
भरत तिवारी की मां आशा देवी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि आयोग के अध्यक्ष उनके घर आए थे और उन्होंने परिवार को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया है। हालांकि आशा देवी का कहना है कि उन्हें इस जांच प्रक्रिया से न्याय मिलने की उम्मीद नजर नहीं आती।
भाई ने उठाए जांच और गिरफ्तारी पर सवाल
भरत तिवारी के भाई चंदन तिवारी ने कहा कि मामले में हत्या की प्राथमिकी दर्ज होने के कई दिन बाद भी नामजद अधिकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले के कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं को जांच में पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है।
चंदन तिवारी का यह भी कहना है कि परिवार को शुरुआत में न्यायिक जांच से उम्मीद जगी थी, लेकिन अब उस भरोसे में कमी आई है। उन्होंने दोहराया कि मामले की जांच किसी कार्यरत न्यायाधीश या सीबीआई को सौंपी जानी चाहिए।
बहन ने भी जांच प्रक्रिया पर उठाए सवाल
मृतक की बहन ने भी जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि मामले को दबाने या कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। परिवार की ओर से लगातार लगाए जा रहे आरोपों के बीच प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की भूमिका भी चर्चा में बनी हुई है।
एसपी पर धमकाने के आरोप, पुलिस ने किया खंडन
इस बीच भरत तिवारी के भाई द्वारा भोजपुर के एसपी राज पर लगाए गए धमकाने के आरोपों को पुलिस ने सिरे से खारिज कर दिया है। पुलिस की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि एसपी का उद्देश्य केवल पीड़ित परिवार से मिलना, उनका पक्ष जानना और निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाना था।
पुलिस ने दावा किया कि मुलाकात के दौरान महिला पुलिसकर्मी समेत अन्य पुलिसकर्मी भी मौजूद थे। परिवार की ओर से ही भीड़ से अलग बातचीत का अनुरोध किया गया था, जिसके बाद संक्षिप्त बातचीत हुई। पुलिस के अनुसार उस दौरान परिवार ने सुरक्षा और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग रखी थी।
वीडियो जारी कर पुलिस ने दी सफाई
पुलिस ने अपने दावों के समर्थन में एक वीडियो भी जारी किया है। बयान में कहा गया है कि एसपी द्वारा किसी प्रकार की धमकी या दबाव बनाने का आरोप निराधार है। पुलिस का कहना है कि तथ्यों के विपरीत आरोप लगाए जा रहे हैं और मामले की जांच विधिसम्मत तरीके से जारी है।
गौरतलब है कि 24 जून की रात एसपी राज भरत तिवारी के परिजनों से मिलने उनके घर पहुंचे थे। इसके बाद चंदन तिवारी ने आरोप लगाया था कि उन्हें दबाव में लेने की कोशिश की जा रही है। अब इस पूरे विवाद ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
