उत्तराखंड

धामी सरकार का किसानों को बड़ा तोहफा, ₹1000 करोड़ की बारानी कृषि परियोजना से बदलेगी पहाड़ की खेती और किस्मत

देहरादून: उत्तराखंड सरकार पर्वतीय क्षेत्रों में खेती को नई दिशा देने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर काम कर रही है। इसी कड़ी में धामी सरकार ने विश्व बैंक के सहयोग से 1000 करोड़ रुपये की बारानी कृषि परियोजना को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य वर्षा आधारित खेती को मजबूत करना और पहाड़ों में किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना है।

सरकार का फोकस खेती को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाते हुए किसानों की आय बढ़ाने, बागवानी को प्रोत्साहन देने और जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर है।

2030 तक चलेगी परियोजना, 76 हजार किसान परिवारों को होगा लाभ

विश्व बैंक समर्थित यह बारानी कृषि परियोजना वर्ष 2030 तक संचालित की जाएगी। इसके तहत राज्य के आठ पर्वतीय जिलों के करीब 76 हजार किसान परिवारों को सीधे लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

योजना के अंतर्गत किसानों को कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली फसलों की खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वर्षा आधारित खेती को नई मजबूती मिल सके।

‘खेत बचाओ अभियान’ से बागवानी को मिलेगा बढ़ावा

राज्य सरकार की ओर से चलाए जा रहे ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसानों के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं। कृषि क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए बड़ी नर्सरी स्थापित करने पर चार करोड़ रुपये और छोटी नर्सरी के लिए दो करोड़ रुपये तक की सहायता का प्रावधान किया गया है।

इसके साथ ही राज्य में कीवी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 15 करोड़ रुपये की लागत से विशेष परियोजना शुरू की गई है।

मुक्तेश्वर में बनेगा क्लीन प्लांट सेंटर

सेब उत्पादकों को बेहतर गुणवत्ता वाले पौधे उपलब्ध कराने के लिए मुक्तेश्वर में 100 करोड़ रुपये की लागत से क्लीन प्लांट सेंटर स्थापित किया जा रहा है। इस केंद्र के जरिए किसानों को वायरस मुक्त और उच्च गुणवत्ता वाले पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा।

वहीं अल्मोड़ा के चौबटिया में 15 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी स्थापित किया जा रहा है।

फसलों को बचाने के लिए फेंसिंग पर विशेष जोर

उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में बंदरों और जंगली सूअरों द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाना लंबे समय से बड़ी समस्या रही है। इससे निपटने के लिए राज्य सरकार ने खेतों की सुरक्षा और फेंसिंग के लिए 20 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया है।

सरकार का मानना है कि इससे किसानों की मेहनत और फसलों को नुकसान से बचाया जा सकेगा।

पारंपरिक अनाजों को मिलेगा नया बाजार

राज्य सरकार पारंपरिक फसलों को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय फसल प्रोत्साहन कार्यक्रम भी चला रही है। इसके तहत राजमा, गहत, रामदाना, लाल चावल, भट्ट और कौणी जैसी पारंपरिक फसलों के बीज किसानों को सौ फीसदी सब्सिडी पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

साथ ही इन उत्पादों के लिए न्यूनतम मूल्य सुनिश्चित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है, ताकि किसानों को उचित दाम मिल सके और बिचौलियों पर निर्भरता कम हो।

सुगंधित खेती से युवाओं को मिलेगा रोजगार

उत्तराखंड को सुगंधित प्रदेश के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती को भी बढ़ावा दे रही है। इसके तहत लेमनग्रास और डैमास्क गुलाब जैसी फसलों की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

सरकार का लक्ष्य पारंपरिक खेती से दूर हो चुके युवाओं को फिर से कृषि और स्वरोजगार से जोड़ना है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि सरकार का उद्देश्य किसानों को केवल पारंपरिक खेती तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें आधुनिक तकनीक और वैश्विक बाजार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना है।