बंदूक छोड़ मुख्यधारा में लौटे बंडो राकेश की बदली जिंदगी! PM आवास योजना से मिला पक्का घर, पुनर्वास नीति बनी नई शुरुआत का सहारा
रायपुर: कभी हिंसा और भटकाव की राह पर चलने वाले बंडो राकेश उर्फ जोगेंद्र की जिंदगी अब पूरी तरह बदल चुकी है। वर्ष 2016 में सुकमा पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आत्मसमर्पण कर उन्होंने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया था। इसके बाद छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति के तहत उन्हें विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। अब प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत उन्हें पक्का मकान मिलने से उनके परिवार को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का नया आधार मिला है।
आत्मसमर्पण के बाद मिला पुनर्वास का लाभ
मुख्यधारा में लौटने के बाद जिला प्रशासन ने पुनर्वास नीति के तहत बंडो राकेश को आवश्यक सहयोग और सहायता उपलब्ध कराई। शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलने से उनका जीवन सामान्य और सम्मानजनक दिशा में आगे बढ़ा।
PM आवास योजना से मिला पक्का घर
वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की विशेष परियोजना के तहत सुकमा जिला प्रशासन ने बंडो राकेश के लिए पक्के मकान की स्वीकृति दी। जनपद पंचायत और जिला पंचायत सुकमा के मार्गदर्शन में ग्राम पंचायत जीरमपाल (मुतोड़ी) द्वारा आवास निर्माण का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कराया गया।
सुरक्षित भविष्य की मिली नई नींव
पक्का मकान मिलने के बाद बंडो राकेश और उनका परिवार अब सुरक्षित वातावरण में जीवन बिता रहा है। कभी असुरक्षा और संघर्ष से घिरे जीवन की जगह अब उनके सामने बेहतर भविष्य और स्थायी जीवन की नई उम्मीद है। प्रशासन का कहना है कि पुनर्वास नीति और जनकल्याणकारी योजनाएं मुख्यधारा में लौटने वाले लोगों को नई शुरुआत का अवसर दे रही हैं।
युवाओं के लिए बना प्रेरणा का संदेश
बंडो राकेश की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा मानी जा रही है, जो किसी कारणवश हिंसा और भटकाव की राह पर चले गए हैं। उनका जीवन यह संदेश देता है कि विकास, शांति और सरकारी योजनाओं का लाभ ही स्थायी और सम्मानजनक भविष्य का रास्ता है।
बदल रही है नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की तस्वीर
सुकमा जिला प्रशासन के अनुसार, नक्सल प्रभावित इलाकों में अब विकास की नई तस्वीर उभर रही है। जिन क्षेत्रों में कभी हिंसा का माहौल था, वहां अब पक्के मकान, रोजगार और जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है।
