‘विकसित यूपी@2047’ का ब्लूप्रिंट तैयार, 2047 तक 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का बड़ा लक्ष्य
लखनऊ: उत्तर प्रदेश को वर्ष 2047 तक विकसित राज्य बनाने के उद्देश्य से तैयार किए गए ‘विकसित यूपी@2047’ के संशोधित विजन दस्तावेज को अंतिम रूप दे दिया गया है। नियोजन विभाग की ओर से तैयार इस रोडमैप को नीति आयोग की सहमति मिल चुकी है। अब संबंधित विभागों और मंत्रियों की राय लेने के बाद इसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष अंतिम मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।
मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद शुरू होगा क्रियान्वयन
मुख्यमंत्री की स्वीकृति मिलने के बाद सभी विभागों को निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप कार्य शुरू करने के निर्देश जारी किए जाएंगे। इससे पहले प्रारंभिक प्रस्तुतीकरण के दौरान मुख्यमंत्री ने विजन दस्तावेज में कई महत्वपूर्ण संशोधन करने के निर्देश दिए थे। उन्होंने स्पष्ट किया था कि यह दस्तावेज केवल भविष्य की परिकल्पना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के आर्थिक, सामाजिक और आधारभूत विकास का व्यावहारिक रोडमैप होना चाहिए।
जिला, शहर और पंचायत स्तर तक बनाई गई कार्ययोजना
मुख्यमंत्री के निर्देश पर विजन दस्तावेज में जनता, विशेषज्ञों, उद्योग संगठनों और अन्य हितधारकों के सुझावों को शामिल किया गया है। साथ ही विभिन्न क्षेत्रों के लिए अल्पकालिक, मध्यकालिक और दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार की गई है। इस योजना को जिला, शहर और पंचायत स्तर तक प्रभावी ढंग से लागू करने की रणनीति भी तैयार की गई है।
तीन चरणों में तय किए गए आर्थिक लक्ष्य
नियोजन विभाग ने रोडमैप को तीन चरणों में विभाजित किया है। इसके तहत वर्ष 2030 तक उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था, वर्ष 2036 तक दो ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था और वर्ष 2047 तक छह ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र पर रहेगा विशेष फोकस
विजन रोडमैप में कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र के समग्र विकास के लिए उच्च उत्पादकता आधारित रणनीति तैयार की गई है। औद्योगिक क्षेत्र में तकनीक आधारित, निर्यातोन्मुख और वैश्विक प्रतिस्पर्धा वाले विनिर्माण केंद्र विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया है। सरकार का लक्ष्य निवेश, रोजगार सृजन और आधारभूत ढांचे को नई गति देकर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।
जुलाई में शुरू होंगी ‘निपुण संकल्प कार्यशालाएं’
विजन दस्तावेज को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में जुलाई माह से ‘निपुण संकल्प कार्यशालाओं’ का आयोजन भी शुरू किया जाएगा। इन कार्यशालाओं के माध्यम से विभिन्न विभागों और संबंधित पक्षों के बीच समन्वय स्थापित कर निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की रणनीति पर काम किया जाएगा।
