यूपी में खतौनी नियमों में बड़ा बदलाव: अब खेती से गैर-खेती बनी जमीन का भी होगा नामांतरण, विवाद और लोन की परेशानी होगी कम
लखनऊ से एक अहम प्रशासनिक फैसले में राजस्व परिषद ने कृषि भूमि से अकृषि उपयोग में बदली जमीन को लेकर बड़ी राहत देने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इस निर्णय के तहत अब ऐसी जमीनों के लिए खतौनी में नामांतरण की प्रक्रिया को सुगम बनाने की तैयारी की गई है, जिससे जमीन मालिकों को लंबे समय से चली आ रही समस्याओं से निजात मिल सके।
अकृषि भूमि के नामांतरण की राह होगी आसान
अब तक प्रदेश में जिन जमीनों का उपयोग कृषि से बदलकर गैर-कृषि कर दिया गया था, उनकी खतौनी में नामांतरण की सुविधा स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं थी। इसके चलते जमीन मालिकों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता था, खासकर बैंक से ऋण लेने में। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इस तरह की जमीनों का रिकॉर्ड राजस्व अभिलेखों में दर्ज किया जा सकेगा।
राजस्व विवादों पर लगेगी लगाम
राजस्व परिषद का मानना है कि इस फैसले से जमीन से जुड़े विवादों में कमी आएगी। एक ही जमीन को कई बार बेचने जैसे मामलों में अक्सर विवाद सामने आते थे, जिनकी बड़ी वजह अभिलेखों में स्पष्ट जानकारी का अभाव था। अब खतौनी में सही अंकन होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और धोखाधड़ी की संभावनाएं घटेंगी।
धारा 143 को लेकर मांगी गई रिपोर्ट
राजस्व परिषद के अध्यक्ष अनिल कुमार ने सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950 की धारा 143 के तहत यह जानकारी मांगी है कि अकृषि भूमि के नामांतरण, दाखिल-खारिज और वरासत का अंकन राजस्व अभिलेखों में किया जा सकता है या नहीं। इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है।
नाम दर्ज न होने से बैंकिंग और निवेश में आ रही थी दिक्कत
अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि खतौनी में धारा 143 का अंकन न होने के कारण जमीन खरीद-बिक्री के बाद नामांतरण नहीं हो पाता था, जिससे राजस्व विवाद बढ़ते थे। साथ ही, अभिलेखों में नाम दर्ज न होने की वजह से जमीन मालिकों को बैंकिंग सेवाओं, ऋण और निवेश के अवसरों का लाभ लेने में भी कठिनाई होती थी।
वरासत के मामलों में वैयक्तिक विधि ही रहेगा आधार
राजस्व परिषद ने यह भी साफ किया है कि वरासत से जुड़े मामलों का निस्तारण भूमिधर की वैयक्तिक विधि के आधार पर ही किया जाएगा। यानी उत्तराधिकार के मामलों में पहले से लागू नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
