BIG BREAKING: एनडीए के 12 साल के कार्यकाल में धर्मेंद्र प्रधान का पहला बड़ा इस्तीफा, युवाओं के प्रदर्शन को समाप्त करने में नाकाम रही मोदी शाह की जोड़ी
धर्मेंद्र प्रधान बोले ‘भारत की युवाशक्ति ही इस देश की असली ताकत’
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनता गठबंधन (NDA) के पिछले बारह वर्षों के शासनकाल में यह पहला मौका है जब किसी केंद्रीय मंत्री को भारी जनआक्रोश और छात्र आंदोलन के दबाव में अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा है। देश के केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है। पिछले कुछ हफ्तों से लगातार उग्र हो रहे युवा आंदोलन और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में चल रहे राष्ट्रव्यापी प्रदर्शनों के आगे आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा है।
जंतर-मंतर का दबाव और ऐतिहासिक इस्तीफा नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा में हुई गंभीर अनियमितताओं और पेपर लीक विवाद को लेकर देश भर के छात्रों और युवाओं में भारी गुस्सा देखा जा रहा था। दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले कई हफ्तों से डेरा डाले बैठे छात्रों और ‘CJP’ के बैनर तले युवाओं ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को अपनी सबसे मुख्य और गैर-समझौतावादी मांग बना रखा था। शनिवार को स्थिति तब पूरी तरह बदल गई जब भारी विरोध-प्रदर्शनों और सरकार के साथ होने वाली तीखी बैठकों के ठीक पहले धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना त्यागपत्र सौंप दिया।
अपने इस्तीफे के पत्र में प्रधान ने लिखा कि जंतर-मंतर और देश भर में बने हालातों के बीच, राष्ट्र की एकता को बनाए रखने और छात्रों के भविष्य को कानूनी जटिलताओं से बचाने के लिए उन्होंने यह कदम उठाया है। मोदी-शाह की ‘अडिग’ रणनीति और युवाओं का प्रहारप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की राजनीतिक कार्यशैली को हमेशा से कड़े और दृढ़ फैसले लेने के लिए जाना जाता रहा है। शुरुआत में सरकार और शीर्ष नेतृत्व का रुख यह था कि परीक्षा माफिया या प्रशासनिक गड़बड़ियों के लिए सीधे तौर पर मंत्री को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
सरकार शुरू में इस आंदोलन को थमाने के लिए केवल प्रशासनिक फेरबदल और दोबारा परीक्षा कराने जैसे कदमों पर टिकी थी। शुरुआती दौर में मोदी-शाह की जोड़ी ने यह संदेश देने की कोशिश की थी कि दबाव में आकर इस्तीफे देने की संस्कृति उनकी कार्यशैली का हिस्सा नहीं है। हालांकि, जैसे-जैसे ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में यह आंदोलन देशव्यापी रूप लेता गया और जंतर-मंतर पर युवाओं का हुजूम उमड़ता गया, वैसे-वैसे सरकार की रणनीतिक दीवारें कमजोर पड़ने लगीं।
मोदी-शाह की जोड़ी इस तीव्र युवा असंतोष को शांत करने में नाकाम साबित हुई
अंततः मोदी-शाह की जोड़ी इस तीव्र युवा असंतोष को शांत करने में नाकाम साबित हुई और सरकार को बैकफुट पर आते हुए मंत्री का इस्तीफा स्वीकार करना पड़ा। आंदोलन की जीत और राजनीतिक मायने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों और CJP समर्थकों ने जश्न मनाया। छात्रों के इस नए राजनीतिक व सामाजिक आंदोलन ने यह साबित कर दिया है कि संगठित युवा शक्ति भारतीय राजनीति की स्थापित व्यवस्था को भी अपने हिसाब से मोड़ने का माद्दा रखती है। बारह साल के एनडीए कार्यकाल में इस पहले इस्तीफे ने आगामी राजनीतिक समीकरणों और प्रशासनिक जवाबदेही पर एक गहरी छाप छोड़ी है।
