AI वीडियो पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, सपा नेता को अतीक अहमद से जोड़ने वाले वीडियो हटाने का मेटा को आदेश
नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलीम इकबाल शेरवानी को दिवंगत गैंगस्टर अतीक अहमद से जोड़ने वाले कथित एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) वीडियो पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने फेसबुक और इंस्टाग्राम संचालित करने वाली कंपनी मेटा को ऐसे दो वीडियो हटाने का निर्देश दिया है। साथ ही वीडियो प्रसारित करने वाले कथित पत्रकार और उसे दोबारा साझा करने वाले एक अन्य प्रतिवादी को भी अगले आदेश तक इन वीडियो को पुनः पोस्ट करने से रोक दिया है।
मानहानि वाद पर सुनवाई के दौरान आया आदेश
पूर्व केंद्रीय मंत्री सलीम इकबाल शेरवानी की ओर से दायर मानहानि वाद पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की एकल पीठ ने यह अंतरिम आदेश पारित किया। अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले को विचारणीय मानते हुए मेटा को विवादित वीडियो अपने प्लेटफॉर्म से हटाने के निर्देश दिए।
वीडियो में क्या दावा किया गया था?
याचिका के अनुसार, एआई तकनीक से तैयार किए गए इन वीडियो में दावा किया गया था कि सलीम इकबाल शेरवानी ने अपनी फैक्टरी में मजदूरों की हड़ताल खत्म कराने के लिए अतीक अहमद की मदद ली थी। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया था कि उन्होंने अतीक अहमद को प्रभावशाली बनने में सहयोग दिया था।
शेरवानी ने अदालत को बताया कि ये सभी दावे पूरी तरह झूठे, भ्रामक और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाले हैं।
दोबारा पोस्ट करने पर भी लगाई रोक
हाई कोर्ट ने न केवल मेटा को वीडियो हटाने का आदेश दिया, बल्कि कथित पत्रकार और वीडियो को दोबारा प्रकाशित करने वाले एक अन्य प्रतिवादी को भी अगले आदेश तक इन्हें पुनः साझा करने से रोक दिया।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में कोई अन्य व्यक्ति या संस्था इन वीडियो को फिर से प्रसारित करती है, तो सलीम इकबाल शेरवानी मेटा से उन्हें हटाने का अनुरोध कर सकते हैं।
प्रथम दृष्टया मानहानि का मामला पाया
याचिका में कहा गया कि विवादित वीडियो पत्रकारिता आचरण के मानदंड, 2022 का उल्लंघन करते हैं और पूरी तरह मानहानिकारक हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी गौर किया कि कानूनी नोटिस मिलने के बावजूद संबंधित प्रतिवादी ने यह नहीं नकारा कि वीडियो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध थे।
इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाई कोर्ट ने मेटा को वीडियो हटाने का निर्देश जारी किया। साथ ही याचिकाकर्ता को आवश्यकता पड़ने पर अन्य संबंधित पक्षों को भी मुकदमे में शामिल करने की अनुमति दी गई।
