दिल्ली-NCR में लगातार यौन अपराधों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कालकाजी गैंगरेप और चलती स्लीपर बस में नाबालिग से छेड़छाड़ का लिया स्वतः संज्ञान
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली-NCR में हाल के दिनों में सामने आए रेप और यौन उत्पीड़न के मामलों का स्वतः संज्ञान लिया है। इनमें दिल्ली के कालकाजी मंदिर के पास एक पार्क में 17 वर्षीय लड़की के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म और ग्रेटर नोएडा-दिल्ली क्षेत्र में चलती स्लीपर बस में 16 वर्षीय नाबालिग के साथ कथित यौन उत्पीड़न का मामला शामिल है। सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक सूची में 28 सितंबर 2026 को जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ दर्ज है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर PIL दर्ज करने को कहा
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में यौन अपराधों की लगातार सामने आ रही घटनाओं पर चिंता जताई। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री को इस मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज करने और सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
पीठ के अनुसार, हालिया घटनाओं के साथ दिल्ली-NCR में यौन अपराधों की अन्य रिपोर्टों को देखते हुए कानून लागू करने वाली एजेंसियों और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आती हैं।
सार्वजनिक जगहों को हाई-रिस्क जोन बनने से रोकने पर जोर
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सम्मान के साथ और हिंसा के डर के बिना जीने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का अहम हिस्सा है।
अदालत ने यह भी कहा कि पार्क, सड़कें, बसें, मेट्रो स्टेशन, सबवे और फुटब्रिज जैसी सार्वजनिक जगहें खराब रोशनी, निगरानी की कमी, गश्त के अभाव या प्रशासन की ऐसी कमियों के कारण हाई-रिस्क जोन नहीं बननी चाहिए, जिन्हें रोका जा सकता है।
कालकाजी मंदिर के पास 17 वर्षीय लड़की से कथित गैंगरेप
मामलों में शामिल एक घटना दिल्ली के कालकाजी मंदिर के पास एक पार्क की है। पुलिस के मुताबिक, 22 सितंबर को 17 वर्षीय लड़की अपने एक पुरुष मित्र के साथ कालकाजी मंदिर गई थी और बाद में पास के एक पार्क में चली गई।
आरोप है कि वहां तीन लोगों ने उनसे संपर्क किया और खुद को पुलिसकर्मी बताया। कथित तौर पर आरोपियों ने उन्हें धमकाया और उनके मोबाइल फोन छीन लिए। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि इनमें से दो लोग उसे पार्क के सुनसान हिस्से में ले गए, जहां उसके साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न किया गया।
पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि आसिफ नाम के एक आरोपी ने उसे धमकाते हुए बंदूक दिखाई। पीसीआर कॉल मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। बाद में मुठभेड़ के दौरान आसिफ को पकड़ा गया और उसे गोली लगने की बात सामने आई। अन्य दो आरोपियों की तलाश जारी थी।
चलती स्लीपर बस में 16 वर्षीय नाबालिग से कथित यौन उत्पीड़न
सुप्रीम कोर्ट की स्वतः संज्ञान वाली कार्यवाही में ग्रेटर नोएडा-दिल्ली क्षेत्र में चलती स्लीपर बस के अंदर 16 वर्षीय लड़की के साथ कथित यौन उत्पीड़न का मामला भी शामिल है। अगस्त में सामने आई इस घटना में उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की एक लड़की शामिल थी, जो नोएडा की ओर गई थी और अपना स्टॉप छूटने के बाद एक स्लीपर बस में सवार हुई थी।
आरोप है कि बस के चालक और परिचालक ने उसके साथ यौन उत्पीड़न किया और बाद में उसे दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास छोड़ दिया।
NHRC भी मामले का ले चुका है संज्ञान
इस घटना का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग पहले ही स्वतः संज्ञान ले चुका है। आयोग ने दिल्ली और गौतम बुद्ध नगर के पुलिस आयुक्तों तथा मैनपुरी के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी कर मामले की जांच और पीड़िता को दिए गए मुआवजे, यदि कोई हो, से संबंधित रिपोर्ट मांगी थी।
पुलिस ने बस के चालक और परिचालक को गिरफ्तार किया था। जांच के लिए स्लीपर बस को जब्त कर फोरेंसिक परीक्षण कराया गया। जांचकर्ताओं ने बस की आवाजाही और घटना से जुड़े घटनाक्रम का पता लगाने के लिए रास्ते में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी जुटाई।
अपराध रोकने और जवाबदेही तय करने पर जोर
सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों से यौन अपराधों की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाने पर जोर दिया। अदालत ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और कमजोर लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की जरूरत भी रेखांकित की।
