गुरुग्राम में पूर्व मंत्री गोपाल कांडा के 3 ठिकानों पर ED की छापेमारी, 248.46 करोड़ रुपये की कथित फंड हेराफेरी की जांच
गुरुग्राम: हरियाणा के पूर्व राज्य मंत्री गोपाल कांडा से जुड़े गुरुग्राम के तीन ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापेमारी की है। यह कार्रवाई रियल एस्टेट कंपनी वाटिका से जुड़े कथित फंड हेराफेरी मामले में की जा रही है। ईडी ने धन के लेन-देन और निवेशकों की रकम कथित तौर पर दूसरी कंपनियों में ट्रांसफर किए जाने से जुड़े दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच शुरू की है।
661 निवेशकों से 248.46 करोड़ रुपये जुटाने का आरोप
यह मामला गुरुग्राम के चार रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स से जुड़ा बताया जा रहा है। जांच के अनुसार, इन प्रोजेक्ट्स के जरिए 661 निवेशकों से करीब 248.46 करोड़ रुपये जुटाए गए। निवेशकों को प्रोजेक्ट का कब्जा देने, रिटर्न, लीज रेंटल और सेल डीड पूरा करने का भरोसा दिया गया था।
आरोप है कि निवेशकों से रकम लेने के बावजूद अब तक उन्हें प्रोजेक्ट्स का कब्जा नहीं दिया गया और न ही वादा किए गए सेल डीड का निष्पादन किया गया। जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि निवेशकों से प्राप्त रकम को कथित तौर पर दूसरी जगह डायवर्ट कर गोपाल कांडा से जुड़ी कंपनियों में ट्रांसफर किया गया।
निवेशकों की रकम के वित्तीय लेन-देन की जांच
ईडी की जांच में निवेशकों से प्राप्त रकम के वित्तीय लेन-देन और कथित तौर पर घरेलू खरीदारों के फंड के डायवर्जन से जुड़े विवरण सामने आने की बात कही गई है। जांच एजेंसी के मुताबिक, कथित तौर पर डायवर्ट की गई रकम बाद में गोपाल कांडा से जुड़ी विभिन्न कंपनियों में ट्रांसफर की गई।
PMLA की धारा 17 के तहत कार्रवाई
इसी वित्तीय ट्रेल और कथित फंड डायवर्जन के आधार पर ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 17 के तहत गुरुग्राम में तीन ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया है। ईडी की कार्रवाई गोपाल कांडा के आवास, फार्म हाउस और कार्यालय परिसर में चल रही है।
दस्तावेजों और दूसरे साक्ष्यों की हो रही जांच
ईडी की टीम कथित तौर पर निवेशकों की रकम के इस्तेमाल, उसके वित्तीय ट्रेल और अलग-अलग कंपनियों में किए गए ट्रांसफर से संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है। इसके साथ ही मामले से जुड़े अन्य साक्ष्य भी जुटाए जा रहे हैं।
अगस्त 2023 में भी हुई थी ED की कार्रवाई
इससे पहले अगस्त 2023 में भी गोपाल कांडा से जुड़े ठिकानों पर ईडी कार्रवाई कर चुकी है। उस दौरान करीब 21 घंटे तक दस्तावेजों की जांच की गई थी।
