बिहार

बख्तियारपुर के नाम पर बिहार में फिर सियासत तेज, सम्राट चौधरी बोले- बदलना चाहिए; संतोष मांझी ने सुझाया ‘नीतीशपुरम’

पटना: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पूर्व मुख्यमंत्री और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के जन्मस्थान बख्तियारपुर का नाम बदलने की चर्चा पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि वह खुद भी बख्तियारपुर का नाम बदलना चाहते हैं, हालांकि सरकार की ओर से फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। इसी बीच हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार सरकार में लघु जल संसाधन मंत्री संतोष मांझी ने बख्तियारपुर के लिए नया नाम सुझाते हुए इसे ‘नीतीशपुरम’ करने की मांग की है।

बख्तियारपुर के नाम को बदलने की मांग कोई नई नहीं है। पटना जिले में स्थित इस शहर का नाम बदलने की मांग पिछले ढाई से तीन दशकों के दौरान अलग-अलग मौकों पर सामाजिक संगठनों और नेताओं की ओर से उठती रही है। हालांकि, मुख्यमंत्री रहते हुए नीतीश कुमार इस मांग के पक्ष में नहीं रहे थे।

संतोष मांझी ने क्यों सुझाया ‘नीतीशपुरम’ नाम

संतोष मांझी ने बुधवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि बख्तियारपुर सिर्फ एक भौगोलिक पहचान नहीं है, बल्कि यह उस जननेता की जन्मभूमि है, जिन्होंने लंबे सार्वजनिक जीवन के जरिए बिहार की राजनीति, विकास और शासन को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार का संघर्ष, जीवन-यात्रा और उनसे जुड़ी अनेक स्मृतियां इसी धरती से जुड़ी हैं।

संतोष मांझी ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सामने बख्तियारपुर का नाम बदलकर ‘नीतीशपुरम’ रखने का प्रस्ताव रखा। उनका कहना है कि नीतीश कुमार की जन्मभूमि को उनके नाम से सम्मानित करना महज नाम बदलने का मामला नहीं होगा, बल्कि इससे इस मिट्टी के गौरव, इतिहास और उससे जुड़ी जनभावनाओं को भी सम्मान मिलेगा।

सम्राट चौधरी ने कहा- मैं भी नाम बदलने के पक्ष में

बख्तियारपुर के नाम को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक दिन पहले एक पॉडकास्ट में अपना रुख स्पष्ट किया था। उनसे जब शहर का नाम बदलने की तैयारी को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। हालांकि, उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वह चाहते हैं कि बख्तियारपुर का नाम बदला जाना चाहिए।

बख्तियारपुर नाम पर सम्राट चौधरी ने दिया इतिहास का तर्क

सम्राट चौधरी ने बख्तियारपुर का नाम बदलने के पीछे इतिहास से जुड़ा तर्क दिया। उन्होंने कहा कि यदि बख्तियार खिलजी ने अराजकता फैलाई और इतिहासकारों ने उसके नालंदा विश्वविद्यालय को जलाने की बात लिखी है, तो शहर का नाम बख्तियारपुर नहीं होना चाहिए। उनके बयान से संकेत मिला कि आने वाले समय में शहर का नाम बदलने की दिशा में कदम उठाया जा सकता है।

पहले भी उठते रहे हैं कई नाम

बख्तियारपुर का नाम बदलने को लेकर पहले भी कई प्रस्ताव सामने आ चुके हैं। इसे मगध द्वार, नालंदा, नीतीश नगर, फतेह विहार और शीलभद्र नगर जैसे नाम देने की मांग अलग-अलग समय पर उठती रही है।

साल 2021 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जब पत्रकारों ने बख्तियारपुर का नाम बदलने को लेकर सवाल किया था, तब उन्होंने स्पष्ट किया था कि बख्तियारपुर उनका जन्मस्थान है और इसका नाम नहीं बदला जाएगा।

इस साल नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद सम्राट चौधरी के नेतृत्व में एनडीए सरकार के गठन के बाद बख्तियारपुर का नाम बदलने की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है।