दिल्ली-NCR में ED का बड़ा एक्शन, 386 करोड़ की कथित धोखाधड़ी में 7 ठिकानों पर छापेमारी; 600 से ज्यादा घर खरीदारों से जुड़ा मामला
नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 386 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली-NCR में बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने 19 और 20 अगस्त को सात ठिकानों पर तलाशी और सर्वे अभियान चलाया। यह कार्रवाई ताशी ग्रुप और उससे जुड़ी कंपनियों के खिलाफ दर्ज मामलों की जांच के तहत की गई है।
600 से ज्यादा घर खरीदारों से जुड़ा मामला
ईडी के मुताबिक, जांच गुरुग्राम के सेक्टर-111 स्थित ताशी कैपिटल गेटवे और सेक्टर-68 स्थित ओरियन गैलेक्सी प्रोजेक्ट से जुड़ी है। इन परियोजनाओं में घर खरीदने वाले 600 से ज्यादा लोगों से कथित तौर पर करीब 386 करोड़ रुपये लिए गए, लेकिन आरोप है कि 10 से 15 साल बीतने के बावजूद कई खरीदारों को उनके घरों का कब्जा नहीं मिला।
जांच एजेंसी ने यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस और हरियाणा पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा की ओर से दर्ज कई एफआईआर और चार्जशीट के आधार पर शुरू की है। मामले में ताशी लैंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, केएनएस इन्फ्राकॉन प्राइवेट लिमिटेड, सोनी इन्फ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड और रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल काशी नाथ शुक्ला समेत अन्य संबंधित कंपनियों और लोगों की जांच की जा रही है।
120 करोड़ रुपये के कथित गबन का आरोप
ईडी का कहना है कि अब तक की जांच में निवेशकों से जुटाई गई रकम के कथित गलत इस्तेमाल और उसे दूसरी जगह भेजे जाने के संकेत मिले हैं। एजेंसी के अनुसार, निवेशकों के फंड में से करीब 120 करोड़ रुपये के कथित गबन की भी जांच की जा रही है।
जांच में हाउसिंग लोन से जुड़ी कथित धोखाधड़ी और निवेशकों की रकम को दूसरी कंपनियों में स्थानांतरित करने के आरोप भी शामिल हैं। एजेंसी अब कंपनियों के बीच हुए लेन-देन और अलग-अलग परियोजनाओं में धन के इस्तेमाल की पड़ताल कर रही है।
कंपनियों और प्रमोटर से जुड़ी संपत्तियों की जांच
ईडी के अनुसार, घर खरीदारों और निवेशकों से जुटाई गई बड़ी रकम को समूह की आपस में जुड़ी कंपनियों और प्रमोटर के नियंत्रण वाली संस्थाओं के बीच स्थानांतरित किया गया। जांच एजेंसी इस धन के पूरे प्रवाह का पता लगाने में जुटी है।
एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि कथित तौर पर गलत तरीके से स्थानांतरित की गई रकम से किन संपत्तियों की खरीद की गई और अपराध से हुई कुल कमाई कितनी थी।
परिवार के विदेश में निवेश की भी जांच
ईडी ने बताया कि मुख्य प्रमोटर काशी नाथ शुक्ला के परिवार के कुछ सदस्य विदेश में बस गए हैं। एजेंसी के अनुसार, पिछले पांच से दस वर्षों में भारत में मौजूद परिवार की कई बड़ी संपत्तियों को बेचने या नकदी में बदलने की जानकारी भी जांच में सामने आई है।
इसके अलावा परिवार के सदस्यों के नाम पर विदेशी कंपनियों और संस्थाओं में निवेश किए जाने का भी पता चला है। इसमें इंग्लैंड में बुजुर्गों की देखभाल से जुड़ा एक केंद्र भी शामिल बताया गया है।
तलाशी में दस्तावेज और डिजिटल डेटा जब्त
तलाशी अभियान के दौरान ईडी ने जांच के दायरे में आने वाली कंपनियों और परियोजनाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, विदेशी निवेश से संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा जब्त किए हैं।
एजेंसी के मुताबिक, करीब 22 लाख रुपये की राशि वाले बैंक खाते और फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदों के साथ एक लग्जरी कार को भी फ्रीज या जब्त किया गया है। मामले में धन के लेन-देन और कथित मनी ट्रेल की जांच आगे भी जारी है।
