झारखंड

खनिज संशोधन कानून पर JMM का बड़ा ऐलान, भाजपा पर भ्रम फैलाने का आरोप; ‘सड़क से सदन तक लड़ेंगे, जल्द होगा उलगुलान’

रांची: खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक-2026 यानी एमएमडीआर के खिलाफ झारखंड मुक्ति मोर्चा ने व्यापक आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में गुरुवार को रांची के हरमू स्थित सोहराय भवन में हुई केंद्रीय समिति की विस्तारित बैठक में इस मुद्दे पर लंबी लड़ाई लड़ने का फैसला लिया गया। जिला समितियों ने चरणबद्ध आंदोलन के साथ जरूरत पड़ने पर नाकेबंदी का प्रस्ताव रखा है। वहीं राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से मुलाकात के लिए दिल्ली कूच करने का प्रस्ताव भी सामने आया है। पार्टी जल्द इस पर अंतिम फैसला लेगी।

एक-दो दिन में आंदोलन का कार्यक्रम होगा घोषित

बैठक के बाद झामुमो के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने भाजपा नेताओं पर एमएमडीआर संशोधन को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पार्टी इस भ्रम को सफल नहीं होने देगी और सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी। उनके मुताबिक कानूनी और संवैधानिक स्तर पर भी पार्टी अपनी लड़ाई जारी रखेगी।

विनोद पांडेय ने कहा कि अगले एक-दो दिनों में आंदोलन का विस्तृत कार्यक्रम घोषित किया जा सकता है। फिलहाल पार्टी सभी जिलों में जनजागरण अभियान चलाने की तैयारी कर रही है।

जेपीएससी मामले में हाईकोर्ट के आदेश का पालन करेगी सरकार

बैठक के दौरान जेपीएससी और जेएसएससी से जुड़े मामले पर भी चर्चा हुई। विनोद पांडेय ने कहा कि सरकार हाईकोर्ट के निर्देश का अध्ययन करेगी और अदालत के सामने अपना पक्ष रखेगी। उन्होंने कहा कि न्यायालय का जो भी आदेश होगा, सरकार उसका पालन करेगी।

राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने भी न्यायालय के आदेश का सम्मान किए जाने की बात कही। अब झामुमो की ओर से घोषित होने वाले आंदोलन के कार्यक्रम पर सबकी नजर है।

‘राज्य की अस्मिता और अधिकार के लिए संघर्ष जारी रहेगा’

झामुमो विधायक कल्पना सोरेन ने कहा कि केंद्रीय समिति की बैठक में एमएमडीआर संशोधन के अलावा परिसीमन और एसआईआर जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि झारखंड के हक, अधिकार और अस्मिता की रक्षा के लिए पार्टी का संघर्ष मजबूती से जारी रहेगा।

महुआ माजी ने एमएमडीआर संशोधन विधेयक को जल्दबाजी में पारित कराने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सांसदों को इस पर पर्याप्त चर्चा का अवसर नहीं मिला और उन्होंने सदन में अपनी आपत्ति दर्ज कराई। उनके मुताबिक बैठक में सर्वसम्मति से विधेयक के खिलाफ व्यापक जनआंदोलन की बात सामने आई।

‘झारखंड अपना हक लड़कर लेना जानता है’

मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने आरोप लगाया कि संसद में छात्र आंदोलन को लेकर हंगामे के बीच एमएमडीआर संशोधन विधेयक पारित किया गया और इस पर पर्याप्त चर्चा नहीं हुई। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार का उद्देश्य चुनिंदा पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाना है।

योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि झारखंड का इतिहास जल, जंगल और जमीन के अधिकार के लिए संघर्ष का रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य अपना हक लड़कर लेना जानता है और एक बार फिर उलगुलान होगा।

हेमंत सोरेन बोले- 1.36 लाख करोड़ रुपये के बकाये का मुद्दा उठा चुके हैं

केंद्रीय समिति की बैठक के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड सरकार खनन क्षेत्रों से जुड़े करीब 1.36 लाख करोड़ रुपये के बकाये का मुद्दा पहले ही उठा चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब इस बकाये के मुद्दे को भी हाशिये पर डालने की कोशिश हो रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि खनिज संपदा वाले कमजोर राज्यों के आर्थिक अधिकार लगातार सीमित किए जाते रहे तो उनके लिए भविष्य में अपने पैरों पर खड़ा होना और मुश्किल होगा। उन्होंने केंद्र से सवाल किया कि इतने महत्वपूर्ण कानून में बदलाव से पहले राज्य सरकारों को विश्वास में लेना जरूरी नहीं था?

हेमंत सोरेन ने यह भी सवाल उठाया कि किसी कानून के जरिए राज्य को होने वाले नुकसान की भरपाई कौन करेगा। उनके मुताबिक प्रस्तावित संशोधन का असर भविष्य में राज्य के राजस्व और अधिकारों पर पड़ सकता है। साथ ही पहले हुए नुकसान की भरपाई को लेकर भी गंभीर आशंका पैदा हो गई है।

केंद्र की नीतियों पर भी मुख्यमंत्री ने उठाए सवाल

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि केंद्र सरकार विकसित राज्यों और सक्षम वर्गों के प्रति अधिक संवेदनशील है। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी, दलित और पिछड़े वर्गों के प्रति अपेक्षित संवेदनशीलता दिखाई नहीं जा रही है।

उन्होंने कहा कि राज्य के आर्थिक और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े अधिकार कमजोर किए गए तो इसका सीधा असर झारखंड की विकास प्रक्रिया पर पड़ेगा। झामुमो ने साफ कर दिया है कि एमएमडीआर संशोधन के मुद्दे पर वह अब आंदोलन को व्यापक रूप देने की तैयारी में है।