बिहार में मानसून की बड़ी बेरुखी, जून में 46% कम हुई बारिश, जुलाई में भी राहत के आसार कम
पटना: बिहार में इस बार मानसून की शुरुआत उम्मीदों के मुताबिक नहीं रही। दक्षिण-पश्चिम मानसून के समय से पहले पहुंचने के बावजूद राज्य में इसका असर कमजोर दिखाई दिया, जिसके चलते जून महीने में सामान्य से 46 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। बारिश की कमी के कारण राज्य के अधिकांश हिस्सों में भीषण गर्मी और उमस ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं।
मौसम विज्ञान केंद्र पटना के आंकड़ों के अनुसार जून महीने में बिहार में केवल 87.8 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई, जबकि यह सामान्य से 46 प्रतिशत कम है। मानसून की कमजोर गतिविधियों का असर राज्य के कई जिलों में साफ तौर पर देखने को मिला।
जून में लू और उष्ण लहर का रहा असर
बारिश में भारी कमी के बीच राज्य में दो दिनों तक भीषण उष्ण लहर का प्रकोप बना रहा, जबकि करीब 12 दिनों तक लोगों को लू का सामना करना पड़ा। गर्म हवाओं और तेज धूप ने जनजीवन को प्रभावित किया और तापमान सामान्य से ऊपर बना रहा।
मौसम विभाग के अनुसार पिछले चार वर्षों की तुलना में इस बार पटना, गया, भागलपुर और पूर्णिया समेत कई प्रमुख जिलों में जून के दौरान बारिश का प्रदर्शन काफी कमजोर रहा।
प्रमुख शहरों में बेहद कम हुई बारिश
आंकड़ों के मुताबिक राजधानी पटना में जून के दौरान केवल 35.4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। वहीं गया में 11.3 मिलीमीटर, भागलपुर में 87.2 मिलीमीटर और पूर्णिया में 145 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई।
इन आंकड़ों से साफ है कि राज्य के अधिकांश हिस्सों में मानसून सामान्य रफ्तार से काफी पीछे रहा, जिसका असर कृषि और जल संसाधनों पर भी पड़ सकता है।
मौसम विभाग ने बताई बारिश की कमी की वजह
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार समय से पहले मानसून के आगमन के बावजूद बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव का क्षेत्र विकसित नहीं हो सका। इसके अलावा मानसून पर ला-नीना के प्रभाव और स्थानीय मौसमीय परिस्थितियों के कारण भी मानसून अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखा पाया।
इन्हीं कारणों से जून में बारिश की स्थिति कमजोर रही और राज्य को पर्याप्त वर्षा नहीं मिल सकी।
जुलाई में भी सामान्य से कम बारिश का अनुमान
मौसम विभाग का अनुमान है कि जुलाई महीने में भी मानसून की गतिविधियां सामान्य से कमजोर रह सकती हैं। इसके चलते राज्य में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना जताई गई है।
विशेषज्ञों के मुताबिक तापमान सामान्य से अधिक बने रहने के कारण लोगों को उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ सकता है और राहत देने वाली बारिश का इंतजार अभी और लंबा खिंच सकता है।
पिछले वर्षों की तुलना में कमजोर रहा जून
बीते वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2023 और 2022 की तुलना में इस बार जून में बारिश का स्तर काफी नीचे रहा है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में बंगाल की खाड़ी में बनने वाले मौसमीय तंत्रों पर ही आगे की बारिश काफी हद तक निर्भर करेगी।
