देवदार के जंगल, तीन झरनों की गूंज और पहाड़ी स्वाद का जादू… हिमाचल का जाणा गांव बना पर्यटकों की नई पसंद
कुल्लू: अगर आप भीड़भाड़ से दूर प्रकृति की गोद में कुछ सुकून भरे पल बिताना चाहते हैं, तो हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में स्थित जाणा गांव आपके लिए एक बेहतरीन ठिकाना साबित हो सकता है। देवदार के घने जंगलों, सेब के बागानों और झरनों की मधुर आवाज से घिरा यह खूबसूरत गांव अपनी प्राकृतिक सुंदरता और पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों के लिए देशभर के पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है।
जाणा गांव को जाणा वाटरफॉल के नाम से भी जाना जाता है। सेब के बगीचों के बीच बसे इस गांव में पहुंचते ही ठंडी हवाएं और पहाड़ों का शांत वातावरण यात्रियों को एक अलग ही अनुभव कराता है।
तीन झरनों की खूबसूरती बनाती है यात्रा को यादगार
कुल्लू से करीब 35 किलोमीटर दूर स्थित जाणा वाटरफॉल अपनी अनूठी प्राकृतिक बनावट के लिए जाना जाता है। यहां तीन खूबसूरत झरने मौजूद हैं, जिनमें से दो झरनों की ऊंचाई करीब 10 से 15 फीट है, जबकि तीसरा झरना लगभग 50 फीट की ऊंचाई से गिरता है।
नग्गर से जाणा गांव की दूरी करीब 12 किलोमीटर है, जबकि गांव से वाटरफॉल महज 300 मीटर दूर स्थित है। झरनों के आसपास बैठने और प्रकृति का आनंद लेने के लिए विशेष व्यवस्था भी की गई है।
देवदार के जंगल और सेब के बागानों का अद्भुत संगम
जाणा गांव की ओर जाने वाली सड़क देवदार के हरे-भरे जंगलों और सेब के बगीचों के बीच से होकर गुजरती है। यहां से दिखाई देने वाली कुल्लू घाटी की मनोरम वादियां पर्यटकों को लंबे समय तक याद रहती हैं।
गर्मी के मौसम में भी यहां का ठंडा वातावरण और झरनों से आती ठंडी फुहारें पर्यटकों को राहत का एहसास कराती हैं।
स्थानीय पहाड़ी व्यंजन बढ़ाते हैं सफर का स्वाद
जाणा गांव की यात्रा केवल प्राकृतिक सुंदरता तक सीमित नहीं है। यहां के स्थानीय व्यंजन भी पर्यटकों के बीच खासे लोकप्रिय हैं। वाटरफॉल के पास मौजूद छोटे ढाबों में लाल चावल, अखरोट का सिड्डू, मक्के की रोटी, साग, राजमा, कढ़ी और देसी घी के साथ परोसी जाने वाली बिच्छू बूटी की चटनी का स्वाद यात्रियों को अपनी ओर खींचता है।
यहां भोजन पारंपरिक चूल्हों पर तैयार किया जाता है, जिससे इसका स्वाद और भी खास हो जाता है।
नग्गर कैसल और आर्ट गैलरी भी हैं आकर्षण का केंद्र
जाणा गांव की यात्रा के दौरान पर्यटक नग्गर स्थित प्रसिद्ध आर्ट गैलरी का भी रुख कर सकते हैं, जहां रूस के प्रसिद्ध चित्रकार Nicholas Roerich से जुड़ी कलाकृतियां और उनकी विंटेज कार देखने को मिलती है।
इसके अलावा लगभग 500 वर्ष पुराना Naggar Castle भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। पारंपरिक काष्ठकुणी शैली में बने इस ऐतिहासिक किले से पूरी कुल्लू घाटी का अद्भुत दृश्य दिखाई देता है।
यहां तक पहुंचना भी है आसान
जाणा गांव पहुंचने के लिए पर्यटक चंडीगढ़ से मनाली-कीरतपुर फोरलेन मार्ग के जरिए कुल्लू पहुंच सकते हैं। कुल्लू से नग्गर होते हुए सड़क मार्ग से आसानी से जाणा गांव तक पहुंचा जा सकता है।
हवाई यात्रा करने वाले पर्यटक सीधे Bhuntar Airport पहुंच सकते हैं, जहां से सड़क मार्ग के जरिए जाणा गांव तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। गांव में ठहरने के लिए होटल, होम स्टे और सरकारी विश्राम गृह की भी सुविधा उपलब्ध है।
