छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में खेती का डिजिटल बदलाव: धमतरी में PACS के जरिए किसानों को मिलेगी ड्रोन स्प्रेयर सुविधा

नई दिल्ली : कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। धमतरी देश का पहला जिला बन गया है, जहां प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को ड्रोन स्प्रेयर की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

कलेक्टर के मार्गदर्शन में शुरू हुई पहल
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के नेतृत्व में जिले की 10 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों में इस सुविधा की शुरुआत की गई है। समिति लोहरसी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इस योजना का औपचारिक शुभारंभ किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।

ड्रोन तकनीक का किया गया लाइव प्रदर्शन
कार्यक्रम के दौरान सभी 10 समितियों के प्रशिक्षित ड्रोन पायलटों ने ड्रोन स्प्रेयर का सफल प्रदर्शन किया। इसमें उर्वरक और कीटनाशकों के सटीक छिड़काव, समय की बचत और लागत में कमी जैसे फायदे प्रत्यक्ष रूप से दिखाए गए।

किसानों को मिलेगी आधुनिक खेती की ताकत
कलेक्टर ने कहा कि सहकारी समितियों के माध्यम से आधुनिक तकनीक को किसानों तक पहुंचाना इस पहल का मुख्य उद्देश्य है। ड्रोन तकनीक से खेती में क्रांतिकारी बदलाव संभव है, जिससे किसान कम लागत में अधिक दक्षता के साथ खेती कर सकेंगे और उनकी आय में वृद्धि होगी।

कृषि नवाचार का मॉडल बनेगा धमतरी
उन्होंने यह भी कहा कि जिले को कृषि नवाचार के मॉडल के रूप में विकसित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। यह पहल उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे हर किसान आधुनिक और वैज्ञानिक खेती से जुड़ सके।

CSC के सहयोग से मिलेंगी बहुउद्देशीय सेवाएं
इस योजना के तहत सहकारी समितियों को कॉमन सर्विस सेंटर के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। इसके जरिए किसानों को एक ही स्थान पर ड्रोन सेवा के साथ-साथ विभिन्न डिजिटल और सरकारी सेवाओं का लाभ मिलेगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी पहुंच बढ़ेगी।

इन समितियों के जरिए मिलेगी सुविधा
जिले की बोड़रा, लोहरसी, दोनर, अछोटा, खरेंगा, भोथीडीह, कुंदेल, गड़ाडीह, जुगदेही और करेली समितियों को इस योजना से जोड़ा गया है। इन समितियों के माध्यम से किसानों को जरूरत के अनुसार ड्रोन सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

कम लागत, ज्यादा उत्पादन और नए रोजगार के अवसर
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार ड्रोन तकनीक से कम समय में बड़े क्षेत्र में छिड़काव संभव होगा। इससे रसायनों का संतुलित उपयोग होगा, लागत घटेगी और फसलों को नुकसान भी कम होगा। साथ ही यह पहल युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के नए अवसर भी पैदा करेगी।