Thursday, May 14, 2026
Latest:
पंजाब

‘आप’ मंत्री संजीव अरोड़ा की गिरफ्तारी पर सियासी घमासान, ED कार्रवाई को बताया राजनीतिक बदले की भावना : हाई कोर्ट में चुनौती

चंडीगढ़: आम आदमी पार्टी के मंत्री संजीव अरोड़ा ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई अपनी गिरफ्तारी को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने इस कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताते हुए इसे “राजनीतिक बदले की भावना” का हिस्सा करार दिया है।

हाई कोर्ट में गिरफ्तारी और रिमांड आदेशों को दी चुनौती
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की डिवीजन बेंच के समक्ष हुई, जहां संजीव अरोड़ा की गिरफ्तारी और गुरुग्राम अदालत द्वारा दिए गए रिमांड आदेशों को चुनौती दी गई। अरोड़ा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पुनीत बाली ने दलील दी कि ईडी की कार्रवाई एक राजनीतिक साजिश का हिस्सा है और समानता के आधार पर उन्हें भी वैसी ही राहत दी जानी चाहिए जैसी हाल ही में कुछ भाजपा सांसदों को मिली थी।

‘राजनीतिक प्रतिशोध का मामला’ : अरोड़ा पक्ष का दावा
अदालत में दलील देते हुए वकील ने इस कार्रवाई को राजनीतिक उत्पीड़न का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि पिछले मामलों में अदालत द्वारा राजनीतिक दबाव से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप किया गया था, इसलिए इस मामले में भी समान दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।

ED कार्रवाई और आरोपों का आधार
प्रवर्तन निदेशालय ने संजीव अरोड़ा को 9 मई को ‘हैंपटन स्काई रियल्टी लिमिटेड’ से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था। एजेंसी का आरोप है कि कंपनी द्वारा फेमा नियमों का उल्लंघन किया गया और बिना वास्तविक वस्तु आवागमन के निर्यात दिखाया गया।

आरोपों को बताया गया गलत, लेनदेन को बताया वैध
अरोड़ा के वकील ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि सभी लेनदेन बैंकिंग चैनलों और चेक के माध्यम से किए गए थे और निर्यात प्रक्रिया कस्टम क्लीयरेंस के तहत पूरी हुई थी। उन्होंने कहा कि केवल जीएसटी नंबर को लेकर उठाए गए सवालों के आधार पर किसी को फंसाया नहीं जा सकता।

ECIR और FIR प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
वकील ने ईडी की ECIR की वैधता पर भी सवाल उठाए और दावा किया कि यह पूरी तरह एक पुलिस FIR पर आधारित है। उन्होंने आरोप लगाया कि एफआईआर प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और इसकी कॉपी तक उपलब्ध नहीं कराई गई।

‘चयनात्मक कार्रवाई’ का आरोप
सुनवाई के दौरान वकील ने दावा किया कि ईडी द्वारा कुछ मामलों में सख्त कार्रवाई की जाती है जबकि कुछ मामलों में राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार नरमी बरती जाती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि राजनीतिक बदलाव के बाद कुछ मामलों में कार्रवाई नहीं हुई।

गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर सवाल
अरोड़ा पक्ष ने यह भी दलील दी कि गिरफ्तारी प्रक्रिया में कानूनी अनियमितताएं हुईं। वकील ने कहा कि गिरफ्तारी के आधार और समय को लेकर भी विरोधाभास है और रिमांड आदेश बिना उचित सुनवाई के पारित किए गए।

अगली सुनवाई 14 मई को
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 14 मई के लिए निर्धारित कर दी है।