Friday, April 24, 2026
उत्तर प्रदेश

स्मार्ट प्रीपेड मीटर विवाद: बिजली बहाली में देरी पर UPPCL को नोटिस, हर मामले में ₹1 लाख जुर्माने पर विचार

लखनऊ। प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं को रीचार्ज के बाद समय पर बिजली आपूर्ति बहाल न होने के मामले में विद्युत नियामक आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) को नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर जवाब तलब किया है। साथ ही यह भी पूछा है कि स्टैंडर्ड ऑफ परफॉर्मेंस के उल्लंघन पर प्रत्येक मामले में एक-एक लाख रुपये का जुर्माना क्यों न लगाया जाए।

रीचार्ज के बाद भी घंटों नहीं जुड़ी बिजली, कॉरपोरेशन ने मानी चूक

मामले में पावर कॉरपोरेशन द्वारा 17 अप्रैल को दाखिल जवाब में यह स्वीकार किया गया है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर वाले उपभोक्ताओं की बिजली आपूर्ति बहाल करने में तय मानकों का पालन नहीं हुआ। आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में 1,93,143 उपभोक्ताओं के कनेक्शन रीचार्ज के बाद भी दो घंटे से अधिक समय तक बहाल नहीं किए जा सके। इस मुद्दे को उपभोक्ता परिषद ने लोक महत्व प्रस्ताव के जरिए आयोग के समक्ष उठाया था।

16 में से 10 दिन नियमों का उल्लंघन, आयोग ने जताई कड़ी नाराजगी

कॉरपोरेशन की रिपोर्ट के आधार पर आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह के निर्देश पर मामले की समीक्षा की गई। रिपोर्ट में 16 दिनों के आंकड़ों में से 10 दिनों में निर्धारित समयसीमा का उल्लंघन पाया गया। स्टैंडर्ड्स ऑफ परफॉर्मेंस विनियम-2019 के तहत रीचार्ज के दो घंटे के भीतर कम से कम 95 प्रतिशत मामलों में बिजली आपूर्ति बहाल करना अनिवार्य है, लेकिन कई दिनों में यह आंकड़ा घटकर 77 प्रतिशत तक पहुंच गया।

इन तारीखों पर सामने आई लापरवाही

जांच में 13, 14, 16, 17, 18, 23, 25 और 28 मार्च तथा 2 और 7 अप्रैल 2026 को नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आए। आयोग ने इन तिथियों को आधार बनाते हुए कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए हैं।

उपभोक्ता परिषद ने उठाया 70 लाख मीटर का मुद्दा

इधर, उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने नियामक आयोग से मुलाकात कर एक और बड़ा मुद्दा उठाया। उन्होंने प्रदेश में नए कनेक्शनों पर प्रीपेड मीटर अनिवार्य किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि केंद्र सरकार की मंशा के विपरीत यह निर्णय लागू किया जा रहा है। साथ ही, बिना उपभोक्ता की सहमति के लगाए गए 70 लाख से अधिक स्मार्ट मीटरों को अभी तक पोस्टपेड में परिवर्तित न किए जाने पर भी जल्द निर्णय की मांग की गई है।