मध्य प्रदेश

महाकाल मंदिर में 4 मार्च से बदलेगा टाइम टेबल: ठंडे जल से होगा स्नान, तीन प्रमुख आरतियों का समय परिवर्तित

इंदौर। पावन नगरी उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में ग्रीष्मकालीन दिनचर्या 4 मार्च से लागू हो जाएगी। चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से अवंतिकानाथ बाबा महाकाल की सेवा-पूजा का क्रम गर्मी के अनुरूप बदलेगा। इस दौरान भगवान को ठंडे जल से स्नान कराया जाएगा और प्रतिदिन होने वाली पांच आरतियों में से तीन के समय में परिवर्तन किया जाएगा। यह व्यवस्था शरद पूर्णिमा तक प्रभावी रहेगी।

साल में दो बार बदलती है बाबा महाकाल की दिनचर्या

मंदिर परंपरा के अनुसार वर्ष में दो बार भगवान महाकाल की दिनचर्या और आरती के समय में बदलाव किया जाता है। कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से फाल्गुन पूर्णिमा तक छह माह तक शीतकालीन व्यवस्था लागू रहती है। इस अवधि में भगवान का स्नान गर्म जल से कराया जाता है और आरतियां भी उसी अनुसार निर्धारित समय पर संपन्न होती हैं। होली के अगले दिन से यानी चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से ग्रीष्मकालीन क्रम शुरू हो जाता है, जिसमें पुजारी भगवान को ठंडे जल से स्नान कराते हैं और आरतियों के समय में भी संशोधन किया जाता है।

कार्तिक प्रतिपदा से होली तक आरतियों का समय

शीतकालीन व्यवस्था के तहत भस्म आरती तड़के 4 बजे से सुबह 6 बजे तक होती है। बालभोग आरती सुबह 7.30 बजे से 8.15 बजे तक और भोग आरती सुबह 10.30 बजे से 11.15 बजे तक संपन्न होती है। संध्या पूजा शाम 5 बजे, संध्या आरती शाम 6.30 बजे से 7.15 बजे तक तथा शयन आरती रात 10.30 बजे से 11 बजे तक होती है।

चैत्र प्रतिपदा से शरद पूर्णिमा तक नई समय-सारिणी

ग्रीष्मकालीन व्यवस्था लागू होने के बाद भस्म आरती का समय तड़के 4 बजे से सुबह 6 बजे तक यथावत रहेगा। बालभोग आरती सुबह 7 बजे से 7.45 बजे तक और भोग आरती सुबह 10 बजे से 10.45 बजे तक होगी। संध्या पूजा शाम 5 बजे ही होगी, जबकि संध्या आरती का समय बदलकर शाम 7 बजे से 7.45 बजे तक कर दिया गया है। शयन आरती रात 10.30 बजे से 11 बजे तक पूर्ववत जारी रहेगी।

मंदिर प्रशासन के अनुसार यह बदलाव पूरी तरह पारंपरिक पंचांग व्यवस्था के अनुरूप किया जा रहा है, ताकि ऋतु परिवर्तन के साथ भगवान महाकाल की सेवा-पूजा विधि भी उसी अनुरूप संचालित हो सके।