सिरमौर की बहू ने किया कमाल: गोद में बच्चे और हाथ में किताबें, पहले प्रयास में पास किया UGC NET
नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के संगड़ाह उपमंडल के टीकरी गाँव की सीमा देवी ने साबित कर दिया कि मातृत्व और पारिवारिक जिम्मेदारियां कभी सपनों की राह में रोड़ा नहीं बन सकतीं। बचपन में पिता को खो देने वाली सीमा ने शिक्षा के प्रति अपने जुनून और माता के अटूट विश्वास के सहारे हर मुश्किल को पार किया।
बचपन से ही मेधावी, शिक्षा की राह कभी आसान नहीं थी
स्कूली शिक्षा के दौरान ही सीमा ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। 12वीं कक्षा में शीर्ष स्थान पाने पर उन्हें सरकारी सम्मान स्वरूप लैपटॉप दिया गया। यह वह समय था जब उन्होंने ठान लिया था कि अभाव उनकी पहचान नहीं बदल पाएंगे।
शादी और मातृत्व के बीच भी नहीं डिगा लक्ष्य
साल 2018 में विवाह के बंधन में बंधने के बाद भी सीमा ने अपनी पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के साथ ही जेबीटी, बीएड और हिंदी में एम.ए. की डिग्रियां हासिल कीं। दो छोटे बच्चों की परवरिश और घर की व्यस्तताओं के बीच भी उन्होंने खुद को UGC NET जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा के लिए तैयार किया और पहले प्रयास में ही सफलता हासिल कर ली।
पति का साथ और अटूट संकल्प
सीमा की इस कामयाबी में उनके पति रामानंद, जो पेशे से किसान हैं, का समर्थन अहम रहा। खेती-बाड़ी और घर के कामों के बीच उन्होंने सीमा के सपनों को कभी रोकने नहीं दिया। पति के सहयोग और सीमा के कुशल समय-प्रबंधन का परिणाम है कि सिरमौर आज इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है।
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा
सीमा देवी आज उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं, जो शादी या बच्चों के बाद पढ़ाई छोड़ देती हैं। ग्रामीण परिवेश और सीमित संसाधनों के बावजूद, दृढ़ संकल्प और मेहनत से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं। उनकी यह जीत केवल एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, प्रेरणा और सफलता की मिसाल है।
