पंजाब निकाय चुनाव पर हाईकोर्ट सख्त: ऑनलाइन नामांकन मांग पर चुनाव आयोग को 60 दिन में फैसला करने का निर्देश
चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने स्थानीय निकाय और पंचायती राज चुनावों में ऑनलाइन नामांकन प्रणाली लागू करने की मांग को लेकर राज्य चुनाव आयोग को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने आयोग से कहा है कि वह इस मुद्दे पर 60 दिनों के भीतर निर्णय ले और अपना आदेश याचिकाकर्ता को सूचित करे। अदालत का यह आदेश एडवोकेट निकिल थम्मन की जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद आया है, जिसमें नामांकन प्रक्रिया के दौरान होने वाली हिंसा और अव्यवस्था को रोकने के लिए डिजिटल विकल्प की मांग उठाई गई थी।
खंडपीठ ने प्रतिनिधित्व याचिका पर ‘स्पीकिंग ऑर्डर’ देने को कहा
चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि 14 दिसंबर 2025 को याचिकाकर्ता द्वारा सौंपे गए प्रतिनिधित्व पर विधिवत विचार करते हुए ‘स्पीकिंग ऑर्डर’ पारित किया जाए। अदालत ने जनहित याचिका का निपटारा करते हुए आयोग को तय समयसीमा में निर्णय लेने का आदेश दिया।
याचिका में चुनाव नामांकन के दौरान हिंसा का मुद्दा उठाया गया
जनहित याचिका में कहा गया था कि पंजाब में ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद, नगर निगम और नगर परिषद चुनावों के नामांकन के समय कई बार झड़पें, कागजात फाड़ने और अव्यवस्था की घटनाएं सामने आती हैं, जिससे चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित होती है। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि लगभग हर चुनाव में नामांकन केंद्रों के बाहर मारपीट, उम्मीदवारों को रोकने और दस्तावेज छीनने जैसे मामलों के वीडियो सार्वजनिक होते रहे हैं।
प्रशासनिक निष्पक्षता पर भी उठे सवाल
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि पहले स्थानीय निकाय चुनाव से जुड़े एक मामले में उम्मीदवारों को नामांकन केंद्र तक पहुंचने से रोके जाने के आरोप लगे थे। ऐसे घटनाक्रमों ने प्रशासनिक निष्पक्षता और चुनावी पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं।
संवैधानिक प्रावधानों का हवाला, ऑनलाइन व्यवस्था की मांग
याचिका में तर्क दिया गया कि मौजूदा केवल भौतिक नामांकन प्रणाली, लगातार सामने आ रही हिंसक घटनाओं को देखते हुए, संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21, 243-के और 243-जेडए के तहत स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। इसलिए मांग की गई कि संसद और विधानसभा चुनावों में इस्तेमाल किए जा रहे ‘सुविधा’ प्लेटफॉर्म की तर्ज पर स्थानीय निकाय चुनावों में भी वैकल्पिक ऑनलाइन नामांकन व्यवस्था शुरू की जाए।
