गांव-गांव दुग्ध क्रांति की तैयारी: डेयरी बनेगी ग्रामीण समृद्धि की रीढ़, किसानों को सही दाम और महिलाओं को कारोबार
पटना। सात निश्चय-3 के तहत राज्य सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए डेयरी सेक्टर को केंद्र में रखकर बड़ी पहल शुरू की है। ‘कृषि में प्रगति-प्रदेश में समृद्धि’ निश्चय के अंतर्गत प्रत्येक गांव में दुग्ध उत्पादन समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है। इसका उद्देश्य पशुपालकों को उनके दूध का उचित मूल्य दिलाना, बिचौलियों की भूमिका खत्म करना और गांवों में आय के स्थायी स्रोत विकसित करना है।
दो-तिहाई गांव जुड़े, बाकी पर दो साल में पूरा फोकस
राज्य के कुल 39,073 गांवों में से अब तक 25,593 गांवों में दुग्ध उत्पादन समितियों का गठन हो चुका है। शेष सभी गांवों में अगले दो वर्षों के भीतर समितियां गठित करने के निर्देश पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग को दिए गए हैं। इससे डेयरी से जुड़े छोटे और सीमांत पशुपालक संगठित होंगे और उनकी आमदनी में सीधा इजाफा होगा।
पंचायत स्तर तक पहुंचेगा सुधा दुग्ध नेटवर्क
सात निश्चय-2 के तहत राज्य के सभी प्रखंडों में सुधा दुग्ध बिक्री केंद्र पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं। अब सात निश्चय-3 के तहत इसे और विस्तार देते हुए राज्य की सभी पंचायतों में सुधा दुग्ध बिक्री केंद्र खोलने का फैसला लिया गया है। इससे ग्रामीण इलाकों में दूध और दुग्ध उत्पादों की उपलब्धता स्थानीय स्तर पर सुनिश्चित होगी।
महिला उद्यमिता को मिलेगा सीधा प्रोत्साहन
राज्य की 8053 पंचायतों में से फिलहाल 100 पंचायतों में सुधा दुग्ध बिक्री केंद्र स्थापित हो चुके हैं। शेष 7953 पंचायतों में वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंत तक केंद्र खोलने का लक्ष्य तय किया गया है। इन नए केंद्रों को प्राथमिकता के आधार पर मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से जुड़ी जीविका दीदियों को आवंटित किया जाएगा, जिससे महिलाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता के नए अवसर मिलेंगे।
गांव में ही रोजगार, पलायन पर लगेगा ब्रेक
डेयरी व्यवसाय के विस्तार से ग्रामीण क्षेत्रों में दूध उत्पादन, संग्रहण, बिक्री और प्रसंस्करण से जुड़े रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। इससे गांव के युवाओं और महिलाओं को स्थानीय स्तर पर काम मिलेगा और रोजगार की तलाश में शहरों की ओर होने वाला पलायन भी कम होगा।
दूध की उपलब्धता बढ़ेगी, ग्रामीण बाजार होंगे मजबूत
इस पहल से राज्य में दूध और दुग्ध उत्पादों की उपलब्धता बढ़ेगी। पशुपालकों की आय में वृद्धि होने से उनकी क्रय शक्ति मजबूत होगी, जिससे ग्रामीण बाजारों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी और गांवों की अर्थव्यवस्था को नया संबल मिलेगा।
डेयरी के सहारे आत्मनिर्भर गांव का लक्ष्य
सरकार की यह योजना केवल दूध उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इसका व्यापक उद्देश्य गांवों को आत्मनिर्भर बनाना है। डेयरी को आय, रोजगार और महिला सशक्तिकरण से जोड़कर राज्य सरकार ग्रामीण समृद्धि का एक नया और टिकाऊ मॉडल तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
