इकलौते बेटे की मौत के डेढ़ साल बाद बेसहारा पिता को मिला सहारा, SBI ने सौंपा 20 लाख रुपये का बीमा चेक
सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के नानौता क्षेत्र से संवेदनशील और प्रेरक खबर सामने आई है। गांव तिलफरा निवासी सुरेंद्र सिंह, जिन्होंने एक साल पहले अपने इकलौते बेटे को सड़क हादसे में खो दिया था, अब उन्हें 20 लाख रुपये की बीमा राशि मिली है। यह मदद उस समय मिली जब वे पूरी तरह आर्थिक और मानसिक संकट से गुजर रहे थे।
सड़क हादसे में गई 21 वर्षीय बेटे की जान
सुरेंद्र सिंह के 21 वर्षीय बेटे वंश राणा की अक्टूबर 2024 में देहरादून से लौटते समय सड़क दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो गई थी। बेटे की असमय मौत ने परिवार को झकझोर कर रख दिया। इस सदमे को सहन न कर पाने के कारण कुछ समय बाद उनकी पत्नी का भी निधन हो गया।
बेटे को विदेश भेजने की उम्मीद में सुरेंद्र सिंह पहले ही अपना घर और चार बीघा जमीन बेच चुके थे। बेटे और पत्नी दोनों को खोने के बाद वे न केवल अकेले रह गए, बल्कि आर्थिक रूप से भी पूरी तरह टूट गए। वर्तमान में वे अपने ताऊ के बेटे के मकान में रहने को मजबूर थे।
अंधेरे में उम्मीद की किरण बने बैंक अधिकारी
बेटे की मौत के करीब सवा साल बाद भी सुरेंद्र सिंह इस बात से अनजान थे कि वंश राणा ने State Bank of India के माध्यम से मात्र 1000 रुपये वार्षिक प्रीमियम पर 20 लाख रुपये का पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस लिया था।
इस बीमा की जानकारी तब सामने आई जब बैंक कर्मचारी नियमित केवाईसी (KYC) प्रक्रिया के तहत गांव पहुंचे और उन्हें वंश की मृत्यु की सूचना मिली। दस्तावेजों की जटिल प्रक्रिया और जानकारी के अभाव में सुरेंद्र सिंह के लिए दावा करना लगभग असंभव लग रहा था।
नानौता शाखा के प्रबंधक गौरव कुमार ने पहल करते हुए सभी जरूरी दस्तावेज जुटवाए और उच्च अधिकारियों के निर्देश पर प्रक्रिया को तेज कराया।
रिकॉर्ड समय में स्वीकृत हुई 20 लाख की बीमा राशि
क्षेत्रीय प्रबंधक राजीव रंजन और मुख्य प्रबंधक सचिन देव के समन्वय से बीमा दावा स्वीकृत किया गया और 20 लाख रुपये की राशि सुरेंद्र सिंह के खाते में जमा कर दी गई।
अपना परिवार और जमा-पूंजी गंवा चुके सुरेंद्र सिंह के लिए यह राशि जीवन के कठिन समय में संबल बनकर आई। उन्होंने भावुक होकर बैंक अधिकारियों का आभार जताया।
इस अवसर पर बैंक अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि वे कम प्रीमियम वाली बीमा पॉलिसियां जरूर लें। उनका कहना है कि छोटी-सी बचत और बीमा कवरेज संकट की घड़ी में परिवार के लिए बड़ा सहारा बन सकता है।
