Monday, March 2, 2026
दिल्ली

एफ़आईआर की धमकियों से मेरी आवाज़ नहीं दबेगी, लोकतंत्र और संविधान के पक्ष में बोलता रहूंगा: हर्ष मंदर

नई दिल्ली। मानवाधिकार कार्यकर्ता हर्ष मंदर ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए दिल्ली पुलिस को एक औपचारिक शिकायत सौंपी है। हर्ष मंदर ने मुख्यमंत्री पर संवैधानिक पद पर रहते हुए देश की अल्पसंख्यक मुस्लिम आबादी के खिलाफ नफरत फैलाने वाली भाषा का इस्तेमाल करने का गंभीर आरोप लगाया है और इस आधार पर एफआईआर दर्ज किए जाने की मांग की है।

दिल्ली पुलिस को सौंपी शिकायत, बयान को बताया संविधान विरोधी
अपनी शिकायत में हर्ष मंदर ने कहा है कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के सार्वजनिक बयान न केवल सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि भारतीय संविधान में निहित समानता, धर्मनिरपेक्षता और भाईचारे के मूल्यों के भी प्रतिकूल हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से ऐसे बयानों की अपेक्षा नहीं की जा सकती।

नागरिक होने के नाते विरोध करना मेरा कर्तव्य: हर्ष मंदर
हर्ष मंदर ने कहा कि एक जिम्मेदार नागरिक और मानवाधिकार कार्यकर्ता के रूप में नफरत भरे बयानों के खिलाफ आवाज़ उठाना उनका नैतिक और संवैधानिक दायित्व है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में असहमति और सवाल उठाना अपराध नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।

मुख्यमंत्री के बयान से बढ़ी सियासी हलचल
हर्ष मंदर की शिकायत के बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह हर्ष मंदर के खिलाफ सौ से अधिक एफआईआर दर्ज करवा देंगे। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में तीखी बहस शुरू हो गई है।

‘धमकियों से नहीं डरूंगा’, बोले हर्ष मंदर
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया पर पलटवार करते हुए हर्ष मंदर ने साफ कहा कि एफआईआर की धमकियों से उनकी आवाज़ दबने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि वह लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक मर्यादाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के समर्थन में अपनी बात मजबूती से रखते रहेंगे, चाहे इसके लिए उन्हें कितनी ही कानूनी चुनौतियों का सामना क्यों न करना पड़े।