Monday, March 2, 2026
मध्य प्रदेश

एमपी के हाईवे होंगे और सुरक्षित, एमपीआरडीसी ला रहा ARS 3.0; एक्सीडेंट रिस्पॉन्स होगा सुपरफास्ट

ग्वालियर। मध्य प्रदेश में सड़क सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राज्य के स्टेट हाईवे और प्रमुख जिला सड़कों पर दुर्घटनाओं के बाद राहत और बचाव कार्य को और तेज करने के लिए मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) अपने एक्सीडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम को नए और अत्याधुनिक अवतार में लाने जा रहा है। वर्ष 2014 में शुरू हुए इस सिस्टम का नया संस्करण ARS 3.0 मौजूदा व्यवस्था की तुलना में कहीं ज्यादा स्मार्ट, तेज और समन्वित होगा।

डायल 112, 108 और 100 से होगा सीधा कनेक्शन
नए एआरएस 3.0 सिस्टम को डायल 112, 108 और 100 जैसी आपातकालीन सेवाओं से सीधे जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य यह है कि सड़क हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, एंबुलेंस और अन्य इमरजेंसी सेवाएं बिना किसी देरी के मौके पर पहुंच सकें। इस अपग्रेडेशन पर एमपीआरडीसी करीब 9 करोड़ 25 लाख रुपये खर्च करेगा, जिसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

जीपीएस, सेंसर और कैमरों से तुरंत मिलेगी हादसे की जानकारी
एआरएस 3.0 में आधुनिक तकनीक का व्यापक इस्तेमाल किया जाएगा। हाईवे पर लगे कैमरे, एंबुलेंस और पेट्रोलिंग वाहनों में लगे जीपीएस व सेंसर के जरिए दुर्घटना की सटीक लोकेशन तुरंत सिस्टम तक पहुंचेगी। जानकारी मिलते ही केंद्रीकृत कॉल सेंटर से कंप्यूटर एडेड डिस्पैच सिस्टम के माध्यम से नजदीकी एंबुलेंस और पुलिस को अलर्ट भेजा जाएगा, जिससे घायलों को समय पर प्राथमिक उपचार मिल सके।

डिजिटल डेटाबेस से बेहतर होगी निगरानी
इस सिस्टम के जरिए न सिर्फ त्वरित सहायता सुनिश्चित की जाती है, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं का एक व्यापक डिजिटल डेटाबेस भी तैयार होता है। इससे दुर्घटनाओं के कारणों, संवेदनशील स्थानों और सुधार की जरूरतों की पहचान करना आसान हो जाता है।

अब तक 7 लाख से ज्यादा हादसों में मिली मदद
28 दिसंबर 2014 को शुरू किए गए एआरएस सिस्टम ने अब तक 7 लाख से अधिक सड़क दुर्घटनाओं में मदद पहुंचाई है। तीन फरवरी 2026 तक 7,01,000 से ज्यादा मामलों में यह सिस्टम सक्रिय रहा। वहीं, इस साल एक जनवरी से तीन फरवरी के बीच 502 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनसे जुड़ी 4,117 कॉल कॉल सेंटर को प्राप्त हुईं।

स्टेट हाईवे पर सबसे ज्यादा हादसे दर्ज
आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 में सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं स्टेट हाईवे पर दर्ज की गईं। इस दौरान करीब 3 लाख 85 हजार हादसों की जानकारी एआरएस सिस्टम में दर्ज हुई। अधिकारियों को उम्मीद है कि ARS 3.0 के लागू होने के बाद राहत और बचाव कार्य और अधिक तेज होगा, जिससे दुर्घटनाओं में जानमाल के नुकसान को कम किया जा सकेगा।