इस राज्य में 10 लाख से ज्यादा कर्मचारियों को मिलेगा कैशलेस इलाज, सरकार के ऐलान से स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव
पटना। बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान नीतीश सरकार ने सरकारी सेवकों और जनप्रतिनिधियों को बड़ी राहत देने वाला फैसला लिया है। सरकार ने ऐलान किया है कि अब प्रदेश के विधायक, विधान पार्षद, 10 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारी और उनके आश्रितों को कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा का लाभ मिलेगा। इस फैसले को राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, जिससे इलाज के दौरान आर्थिक बोझ से मुक्ति मिलेगी।
सदन में सवाल उठा, दबाव में आया फैसला
कैशलेस इलाज को लेकर यह घोषणा उस समय हुई, जब भाजपा विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने सदन में सरकार से सीधा सवाल उठाया। पहले उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस विषय पर बैठक कर निर्णय लेने की बात कही, लेकिन भाजपा विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह और जीवेश मिश्रा अपनी मांग पर अड़े रहे। उनका कहना था कि जब सरकार सदन में मौजूद है, तो फैसला भी तुरंत होना चाहिए। विधायकों के दबाव और जनहित को देखते हुए उपमुख्यमंत्री ने सदन में ही कैशलेस इलाज की सुविधा लागू करने का ऐलान कर दिया।
PPP मॉडल पर बनेंगे मेडिकल कॉलेज
स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में सरकार ने एक और अहम घोषणा की है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि बिहार में अब पीपीपी यानी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए सरकार जल्द ही एक अलग नीति लेकर आएगी, जिससे निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ेगी और राज्य में मेडिकल एजुकेशन व स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होगा।
सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर सख्ती
सदन में चर्चा के दौरान सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की अनुपस्थिति का मुद्दा भी उठा। गृह मंत्री ने बताया कि पर्याप्त सुविधाएं देने के बावजूद कई सरकारी डॉक्टर अस्पतालों में नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहते हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए सरकार अब सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक लगाने के लिए सख्त नीति बनाने की तैयारी कर रही है, ताकि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े बदलाव की तैयारी
कैशलेस इलाज, नए मेडिकल कॉलेज और डॉक्टरों की जवाबदेही जैसे फैसलों से साफ है कि सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था में व्यापक सुधार की दिशा में आगे बढ़ रही है। इन कदमों से न केवल सरकारी कर्मचारियों को राहत मिलेगी, बल्कि आम जनता को भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिलने की उम्मीद है।
