Monday, March 2, 2026
उत्तर प्रदेश

फर्रुखाबाद में माफिया अनुपम दुबे के हिस्ट्रीशीटर भाइयों पर शिकंजा, गैंग्स्टर एक्ट में बब्बन-डब्बन समेत छह गिरफ्तार

फर्रुखाबाद में माफिया घोषित अनुपम दुबे के परिवार की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। इंस्पेक्टर रामनिवास यादव और पीडब्ल्यूडी ठेकेदार मो. शमीम की हत्या के मामले में मथुरा जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे अनुपम दुबे के दो हिस्ट्रीशीटर भाइयों समेत छह लोगों को पुलिस ने हिरासत में लेकर गैंग्स्टर एक्ट के तहत बड़ी कार्रवाई की है।

संयुक्त बैठक के बाद गैंग्स्टर एक्ट में मुकदमा दर्ज

पूरे घटनाक्रम से पहले जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की संयुक्त बैठक में विस्तृत मंत्रणा की गई। इसके बाद रिपोर्ट जिला न्यायाधीश को भेजी गई। न्यायाधीश की संस्तुति मिलने के बाद बब्बन, डब्बन समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ गैंग्स्टर एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया। सभी को शुक्रवार को अदालत में पेश किया जाएगा।

फतेहगढ़ और मैनपुरी से हुई गिरफ्तारी

गुरुवार को एसओजी (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) और मऊदरवाजा थाना पुलिस ने फतेहगढ़ कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला कसरट्टा निवासी अनुराग दुबे उर्फ ‘डब्बन’ को फतेहगढ़ से हिरासत में लिया। वहीं उसके दूसरे भाई, मोहम्मदाबाद के ब्लॉक प्रमुख अमित दुबे उर्फ ‘बब्बन’ को जनपद मैनपुरी के कस्बा नबीगंज से पकड़कर मऊदरवाजा थाने लाया गया।

इसके अलावा सहसापुर निवासी विनीत दुबे, अलावलपुर निवासी धर्मेंद्र चतुर्वेदी और दो अन्य लोगों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। सभी को थाने में एक कमरे में बैठाकर पूछताछ की गई।

थाने में देर रात तक चला पुलिस का जमावड़ा

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए थानाध्यक्ष अजब सिंह, एसओजी प्रभारी सचिन चौधरी, वीआईपी सेल प्रभारी अमित गंगवार, यूपी-112 प्रभारी आमोद कुमार सिंह समेत कई थाना प्रभारी देर शाम तक मऊदरवाजा थाने में मौजूद रहे।

70 करोड़ की मंदिर जमीन विवाद बना वजह

बताया जा रहा है कि माफिया अनुपम दुबे के भाइयों और समर्थकों के खिलाफ मारपीट और धमकी देने की शिकायत पुलिस को मिली थी। सात फरवरी की रात मोहल्ला बहादुरगंज निवासी एकलव्य कुमार ने अनुपम दुबे और अन्य साथियों पर जानलेवा हमले का मुकदमा दर्ज कराया था। एकलव्य कुमार ने खुद को श्री वयस्क हनुमान जी महाराज मंदिर का पैरोकार बताया था।

आरोप था कि मंदिर से जुड़ी करीब 70 करोड़ रुपये की जमीन फर्जी अभिलेखों के जरिए अनुपम दुबे ने अपने नाम कर ली थी। जिला प्रशासन ने गैंग्स्टर एक्ट के तहत उस संपत्ति को कुर्क कर लिया था। बाद में जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी ने उक्त जमीन को मंदिर के नाम हस्तांतरित कर दिया था। इसी कार्रवाई से नाराज होकर अनुपम दुबे के लोगों द्वारा हमले की घटना को अंजाम दिए जाने की बात सामने आई।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बढ़ी सतर्कता

गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय ने अनुराग दुबे उर्फ डब्बन की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए निर्देश दिया था कि उसके खिलाफ कोई भी नया मुकदमा जिला न्यायाधीश की अनुमति के बाद ही दर्ज किया जाए। यही कारण रहा कि कार्रवाई से पहले जिला स्तरीय अधिकारियों को लंबी मंत्रणा करनी पड़ी और विधिक प्रक्रिया पूरी की गई।

जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी और पुलिस अधीक्षक आरती सिंह की बैठक के बाद रिपोर्ट जिला न्यायाधीश नीरज कुमार को सौंपी गई। अनुमति मिलने के बाद ही गैंग्स्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। दोनों भाइयों की हिस्ट्रीशीट पहले से खुली हुई है।

पुलिस अधीक्षक आरती सिंह ने स्पष्ट किया कि सभी तथ्यों और कानूनी मानकों पर विचार करने के बाद हिस्ट्रीशीटर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है और आगे भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।