मोबाइल नंबर बंद हुआ तो बैंक खाते पर पड़ सकता है खतरा, समय रहते करा लें डी-लिंक
साहिबगंज में मोबाइल नंबर से जुड़े बैंक खातों को लेकर एक अहम चेतावनी सामने आई है। यदि किसी व्यक्ति का मोबाइल नंबर लंबे समय से बंद है और वह बैंक खाते से जुड़ा हुआ है, तो समय रहते उसे डी-लिंक कराना जरूरी है। ऐसा नहीं करने पर साइबर ठगी का खतरा बढ़ सकता है और खाते से पैसे निकलने की आशंका भी रहती है।
दरअसल, कुछ वर्ष पहले तक मोबाइल कंपनियां ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कई तरह के ऑफर देती थीं और नंबर बंद होने का खतरा भी कम रहता था। इसी कारण लोगों ने एक से अधिक मोबाइल नंबर ले लिए थे। लेकिन अब मोबाइल नंबर चालू रखने के लिए नियमित रूप से निश्चित राशि का रिचार्ज कराना अनिवार्य हो गया है। ऐसे में कई लोग अपने अतिरिक्त नंबरों को रिचार्ज कराना बंद कर देते हैं।
बंद नंबर दूसरे को हो जाता है आवंटित
विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक बंद रहने वाले मोबाइल नंबरों को कंपनियां दोबारा अन्य ग्राहकों को आवंटित कर देती हैं। यदि ऐसा नंबर किसी व्यक्ति के बैंक खाते से जुड़ा हुआ है, तो नया उपयोगकर्ता उस नंबर के माध्यम से बैंकिंग संबंधी जानकारी हासिल कर सकता है और खाते में सेंध लगाने की आशंका पैदा हो सकती है।
इसलिए जिन लोगों ने अपने पुराने मोबाइल नंबरों का उपयोग बंद कर दिया है, उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वह नंबर किसी बैंक खाते से जुड़ा हुआ तो नहीं है। यदि ऐसा है तो तुरंत बैंक शाखा में जाकर उसे डी-लिंक करा लेना चाहिए।
जिले में सामने आ चुका है ऐसा मामला
साहिबगंज में इस तरह की एक घटना सामने भी आ चुकी है। जानकारी के अनुसार व्यवहार न्यायालय में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ता देवेंद्र प्रसाद सिंह ने मिर्जाचौकी निवासी राजकिशोर मंडल को मोबाइल नंबर के माध्यम से 10 हजार रुपये भेजे थे, लेकिन वह राशि राजकिशोर मंडल को नहीं मिली।
बाद में पता चला कि राजकिशोर मंडल ने अपना मोबाइल फोन और सिम जहानाबाद के एक व्यक्ति को बेच दिया था। उस व्यक्ति ने उसी मोबाइल नंबर को अपने बैंक खाते से जोड़ लिया था, जिसके कारण भेजी गई राशि उसके खाते में पहुंच गई। काफी अनुरोध के बाद भी उसने राशि वापस नहीं की।
90 दिन तक रिचार्ज नहीं होने पर नंबर हो सकता है रद्द
अधिकांश मोबाइल कंपनियों में यदि 90 दिनों तक नंबर पर रिचार्ज नहीं कराया जाता है तो उसका पंजीकरण रद्द कर दिया जाता है और वही नंबर किसी दूसरे ग्राहक को आवंटित कर दिया जाता है। हालांकि बीएसएनएल में यह अवधि लगभग छह माह यानी 180 दिनों की होती है।
साइबर जागरूकता बेहद जरूरी
साहिबगंज के अग्रणी जिला प्रबंधक सुधीर कुमार ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति ने अपने मोबाइल नंबर को बैंक खाते से जोड़ रखा है और वह उसे लंबे समय से रिचार्ज नहीं करा रहा है, तो उसे तुरंत संबंधित बैंक में जाकर डी-लिंक कराना चाहिए। अन्यथा नंबर दूसरे को आवंटित होने के बाद खाते में सेंधमारी की आशंका बनी रहती है।
वहीं साइबर सेल के नोडल पदाधिकारी विजय कुशवाहा ने कहा कि वर्तमान समय में साइबर जागरूकता बेहद जरूरी हो गई है। थोड़ी सी लापरवाही भी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है। यदि कोई मोबाइल नंबर उपयोग में नहीं है तो यह सुनिश्चित कर लें कि वह बैंक खाते या किसी भी डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म से जुड़ा हुआ न हो।
