Monday, March 2, 2026
उत्तराखंड

धामी कैबिनेट का ऐतिहासिक फैसला: शोधित पानी से सिंचाई करने वाला पहला राज्य बना उत्तराखंड

देहरादून। जल सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में उत्तराखंड ने बड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के दिशा-निर्देशों के तहत राज्य सरकार ने एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) और एफएसटीपी (फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट) से निकलने वाले शोधित जल के पुन: उपयोग को लेकर नई नीति को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही उत्तराखंड शोधित जल का व्यवस्थित उपयोग करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सचिवालय में आयोजित कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगी। बैठक में कुल 32 प्रस्ताव रखे गए, जिन्हें स्वीकृति प्रदान की गई। गैरसैंण में 9 मार्च से शुरू होने वाले विधानसभा बजट सत्र के मद्देनजर निर्णयों की औपचारिक ब्रीफिंग नहीं की गई।

सिंचाई से लेकर निर्माण कार्यों में होगा उपयोग

विजन-2047 के तहत शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों से निकलने वाले सीवेज के शोधन के बाद प्राप्त उपचारित जल को अब खेतों की सिंचाई, सड़क निर्माण, पार्कों की सिंचाई, सड़कों पर छिड़काव, फायर फाइटिंग, स्टोन क्रशर और भवन निर्माण जैसे कार्यों में उपयोग किया जाएगा। इससे नलकूपों और नदियों पर निर्भरता कम होगी और जल स्रोतों का संरक्षण संभव हो सकेगा।

राज्य में वर्तमान में संचालित 70 एसटीपी से प्रतिदिन लगभग 270 एमएलडी उपचारित जल निकलता है, जिसे अब तक नदियों में प्रवाहित किया जाता रहा है। नई नीति के तहत इस पानी का सुनियोजित उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।

10 रुपये में 1000 लीटर शोधित पानी

सरकार ने एसटीपी से निकलने वाले उपचारित जल की दर 10 रुपये प्रति 1000 लीटर तय की है। पहले चरण में यह पानी टैंकरों के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। दूसरे चरण में नहरों और पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा। अंतिम चरण में अतिरिक्त शोधन संयंत्र स्थापित कर पानी को पीने योग्य बनाने की दिशा में भी काम किया जाएगा।

मौनपालन नीति को भी हरी झंडी

कैबिनेट ने राज्य को उच्च गुणवत्ता वाले शहद और अन्य मौन उत्पादों का अग्रणी केंद्र बनाने के उद्देश्य से मौनपालन नीति को भी मंजूरी दी है। इसके तहत छह वर्षों में 25,000 किसानों को इससे जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि की उम्मीद है।

2026-27 का बजट लगभग 1.10 लाख करोड़ का संभावित

वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट आकार पर भी कैबिनेट में चर्चा हुई। पिछले वर्ष की तुलना में करीब 10 प्रतिशत वृद्धि को स्वीकृति दी गई है। इस बार बजट का आकार लगभग 1.10 लाख करोड़ रुपये रहने की संभावना है। बजट के अंतिम आकार में संशोधन के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया गया है। 11 मार्च को विधानसभा सत्र में बजट पेश किया जाएगा।

कैबिनेट के अन्य अहम फैसले

सेब की अत्याधुनिक नर्सरी विकास योजना को मंजूरी दी गई।
राज्य के 11 नगर निगमों में एक-एक पर्यावरण अभियंता की संविदा नियुक्ति होगी।
उत्तराखंड निवेश और आधारिक संरचना विकास बोर्ड के ढांचे में 13 नए पदों के सृजन को स्वीकृति मिली।
मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना में 21 अशासकीय अनुदानित महाविद्यालयों को शामिल करने का निर्णय लिया गया।
उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत स्वामी विवेकानंद उत्तराखंड ई-पुस्तकालय योजना संचालित की जाएगी।
समान नागरिक संहिता, उत्तराखंड संशोधन विधेयक को प्रख्यापित करने की मंजूरी दी गई।
बलात्कार और पॉक्सो अधिनियम के लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए विकासनगर, काशीपुर और नैनीताल में फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे।

इन फैसलों के साथ धामी सरकार ने जल प्रबंधन, कृषि आय, शिक्षा, न्यायिक सुधार और आधारभूत संरचना विकास जैसे कई मोर्चों पर एक साथ कदम बढ़ाए हैं।