Monday, March 2, 2026
उत्तराखंड

कॉर्बेट की कहानियों वाला चंपावत बनेगा नया टूरिस्ट हॉटस्पॉट, विकास के लिए 4 करोड़ मिले

देहरादून। उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल स्थित चंपावत की ऐतिहासिक पहाड़ियां जल्द ही देश-विदेश के पर्यटकों के लिए रोमांचक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होने जा रही हैं। जिन इलाकों में कभी बाघ की दहाड़ से ग्रामीण सहमे रहते थे और जहां विश्व प्रसिद्ध शिकारी से संरक्षणवादी बने जिम कॉर्बेट ने 1907 से 1938 के बीच अपने अभियान चलाए थे, अब उन्हीं रास्तों को “जिम कॉर्बेट ट्रेल” के रूप में तैयार किया जा रहा है। राज्य सरकार ने पहले चरण में ट्रेल और पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए चार करोड़ रुपये जारी किए हैं।

कॉर्बेट की ऐतिहासिक दास्तानों से रूबरू होंगे सैलानी
चंपावत के कई गांवों में जिम कॉर्बेट ने आदमखोर बाघ और गुलदार का शिकार कर ग्रामीणों को आतंक से राहत दिलाई थी। वर्ष 1907 में उन्होंने उस कुख्यात आदमखोर बाघ को मार गिराया था जिसने 436 लोगों को अपना शिकार बनाया था। इसी तरह पनार घाटी में लंबे अभियान के बाद उस गुलदार को ढेर किया था, जिसने करीब 400 लोगों को निशाना बनाया था। वर्ष 1938 में थाक गांव में उन्होंने अपने जीवन का अंतिम बाघ मारा था। अब इन्हीं घटनाओं से जुड़े स्थलों को ट्रेल के जरिए पर्यटकों से जोड़ा जाएगा।

छह ऐतिहासिक ट्रेल पर होगा पर्यटन विकास
परियोजना के तहत चंपावत, पनार घाटी, तल्ला देश, चूका, दुर्गापीपल और देवीधुरा क्षेत्र में छह प्रमुख ट्रेल विकसित की जा रही हैं। इनमें चंपावत-भारडोली-फुंगर-गौड़ी, चालनिचिना-देवीधूरा-रामेश्वर-पनार नदी क्षेत्र, मंच-तल्लाकोट-तामिल-थौलाकोट, बूम-खलढूंगा-चूका-टनकपुर-थाक, चालथी-डांडा गांव-डांडा रेंज-दुर्गापीपल-आमलाखेरा और पाटी-धुनवार-देवीधुरा मार्ग शामिल हैं।

पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाएं भी बनेंगी
इन ट्रेल पर रास्तों का निर्माण, कार्बेट से जुड़े वन विश्राम गृहों का जीर्णोद्धार, साइनेज, प्रवेश द्वार, रिसेप्शन सेंटर, टिकट घर और पर्यटक सुविधा केंद्र बनाए जाएंगे ताकि यात्रियों को बेहतर अनुभव मिल सके।

स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर शुरू इस परियोजना का उद्देश्य केवल पर्यटन बढ़ाना ही नहीं बल्कि स्थानीय निवासियों की आजीविका के अवसर भी बढ़ाना है। मुख्य वन संरक्षक (ईको टूरिज्म) पीके पात्रो के अनुसार ट्रेल विकसित करने के लिए चंपावत के डीएफओ को चार करोड़ रुपये दिए गए हैं और संचालन में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इससे कुछ लोग गाइड बनेंगे तो कई होम-स्टे जैसी सेवाओं से जुड़ सकेंगे।