Monday, March 2, 2026
राजस्थान

राजस्थान पंचायत चुनाव में बड़ा बदलाव: दो से अधिक संतान वाले भी उतर सकेंगे मैदान में, शैक्षिक योग्यता की शर्त भी खत्म

नई दिल्ली। राजस्थान की राजनीति में पंचायत और शहरी निकाय चुनावों को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनाव में न तो शैक्षिक योग्यता की अनिवार्यता रहेगी और न ही दो से अधिक संतान होने पर चुनाव लड़ने की रोक लागू होगी। सरकार इस संबंध में विधानसभा में विधेयक पारित कराने की तैयारी में है, जिसके बाद नियमों में औपचारिक संशोधन किया जाएगा।

दो बच्चों की शर्त हटाने की तैयारी
राज्य सरकार ने दो से अधिक संतान होने पर पंचायत और शहरी निकाय चुनाव लड़ने की रोक को समाप्त करने का फैसला लिया है। यह प्रतिबंध पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में लागू किया गया था। अब सरकार का मानना है कि इस तरह की शर्तें लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी को सीमित करती हैं, इसलिए इन्हें हटाया जाना जरूरी है।

शैक्षिक योग्यता अब अनिवार्य नहीं
सरकार ने यह भी साफ किया है कि पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनाव में उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता की अनिवार्यता नहीं होगी। यानी अशिक्षित उम्मीदवार भी चुनाव लड़ सकेंगे। यह प्रावधान भी पहले लागू किया गया था, जिसे अब समाप्त करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।

विधानसभा में सरकार का जवाब
विधानसभा में कांग्रेस विधायक पूसराम गोदारा के लिखित प्रश्न के जवाब में सरकार की ओर से बताया गया कि पंचायत और निकाय चुनाव की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। सरकार ने संकेत दिए हैं कि विधायी प्रक्रिया पूरी होते ही चुनावी कार्यक्रम घोषित किया जा सकता है।

राज्यपाल के अभिभाषण पर गरमाई सियासत
विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान राजनीतिक माहौल भी गरमा गया। कांग्रेस विधायक शांति धारीवाल ने बहस के दौरान सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग के लिए आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल किया, जिसे बाद में सदन की कार्यवाही से हटाया गया। धारीवाल ने शिक्षा, स्थानीय निकायों और प्रशासनिक कार्यशैली समेत कई मुद्दों पर सरकार को घेरा।

पोषाहार और आदिवासी मुद्दों पर भी उठा सवाल
चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक रमिला खड़िया ने आदिवासी इलाकों के स्कूलों में वितरित होने वाले पोषाहार की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से दिया जा रहा पोषाहार घटिया स्तर का है। वहीं, भारत आदिवासी पार्टी के विधायक अनिल ने अलग भील प्रदेश की मांग को एक बार फिर सदन में उठाया।