उत्तर प्रदेश

अखिलेश यादव के सामने भिड़े सपा नेता, गाली-गलौज तक पहुंची बात; एक घंटे में एटा-कासगंज की इकाइयां भंग

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी की एक बैठक में दो नेताओं के बीच विवाद सामने आया। एटा और कासगंज के पदाधिकारियों की बैठक में एटा जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष योगेंद्र सिंह यादव और मंजीत यादव के बीच कहासुनी हो गई। बात इतनी बढ़ी कि दोनों के बीच तीखी नोकझोंक और गाली-गलौज होने की बात सामने आई। उस समय सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी बैठक में मौजूद थे और बाद में वह बैठक छोड़कर चले गए। इसके करीब एक घंटे बाद पार्टी ने एटा और कासगंज की जिला इकाइयों को भंग करने का आदेश जारी कर दिया।

पार्टी की बैठक में कैसे शुरू हुआ विवाद

आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति को लेकर एटा और कासगंज के पदाधिकारियों की बैठक बुलाई गई थी। बैठक में मंजीत यादव पार्टी की चुनावी स्थिति और हार के कारणों पर अपनी बात रख रहे थे। इसी दौरान योगेंद्र सिंह यादव भी अपनी बात कहने लगे। मंजीत यादव ने उनकी बात पर आपत्ति जताई, जिसके बाद दोनों के बीच बहस शुरू हो गई।

मामला बढ़ने पर मौजूद अन्य नेताओं ने दोनों को शांत कराने की कोशिश की। रिपोर्ट के मुताबिक, विवाद के दौरान दोनों नेताओं ने अखिलेश यादव के सामने एक-दूसरे को अपशब्द भी कहे। अखिलेश यादव ने नेताओं को अनुशासन में रहने की बात कही और नाराजगी जताई। इसके बाद वह बैठक से बाहर चले गए।

एक घंटे बाद दोनों जिलों की इकाइयां भंग

अखिलेश यादव के बैठक से चले जाने के बाद पार्टी ने एटा और कासगंज में संगठनात्मक कार्रवाई की। दोनों जिलों की जिला कार्यकारिणी और संबंधित फ्रंटल संगठनों को भंग कर दिया गया। दोनों जिलाध्यक्षों को भी हटा दिया गया। पार्टी की ओर से अब दोनों जिलों में नई जिला कार्यकारिणी गठित किए जाने की बात कही गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, विवाद के बाद दोनों नेताओं ने माफी मांगी और खुद को पार्टी का अनुशासित कार्यकर्ता बताया।

एटा में BJP का कब्जा, कासगंज में सपा की स्थिति मजबूत

एटा जिले की चारों विधानसभा सीटों पर 2022 के चुनाव में भाजपा ने जीत दर्ज की थी। वहीं कासगंज जिले की चार विधानसभा सीटों में से तीन पर सपा ने जीत हासिल की थी। ऐसे में दोनों जिलों के संगठन की स्थिति और चुनावी प्रदर्शन को लेकर बैठक में चर्चा की जा रही थी।